4.1 कोच वर्गीकरण की आवश्यकता
भारतीय रेल प्रतिदिन हजारों यात्री रेलगाड़ियों का संचालन करती है। इन रेलगाड़ियों में प्रयुक्त सभी कोच एक समान उद्देश्य के लिए निर्मित नहीं होते। यात्रियों की यात्रा श्रेणी, दूरी, उपलब्ध सुविधाओं तथा परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के कोचों का निर्माण किया जाता है। यही कारण है कि भारतीय रेल ने प्रत्येक प्रकार के कोच के लिए एक मानकीकृत वर्गीकरण (Classification System) एवं कोडिंग प्रणाली विकसित की है।
कोच वर्गीकरण का उद्देश्य केवल अलग-अलग प्रकार के कोचों की पहचान करना नहीं है। यह प्रणाली परिचालन, अनुरक्षण, आरक्षण, निर्माण, स्पेयर पार्ट्स प्रबंधन, निरीक्षण तथा तकनीकी अभिलेखों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए यदि किसी कोच का कोड GS है, तो रेलवे कर्मचारी तुरंत समझ जाता है कि यह सामान्य द्वितीय श्रेणी (General Second Class) कोच है। इसी प्रकार SLR, B, A, HA, EOG अथवा HOG जैसे कोड भी अपने-अपने विशिष्ट प्रकार के कोचों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
C&W विभाग के लिए इन कोडों का ज्ञान इसलिए आवश्यक है क्योंकि प्रत्येक प्रकार के कोच की संरचना, उपकरण, अनुरक्षण आवश्यकताएँ तथा निरीक्षण बिंदु एक-दूसरे से भिन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए वातानुकूलित कोच में अतिरिक्त विद्युत उपकरण, एयर-कंडीशनिंग प्रणाली तथा विशेष दरवाजे होते हैं, जबकि सामान्य कोच में इनकी आवश्यकता नहीं होती। इसी प्रकार पैंट्री कार, पावर कार अथवा लगेज-कम-ब्रेक वैन के अनुरक्षण में भी सामान्य यात्री कोचों की अपेक्षा कई अतिरिक्त बिंदुओं का ध्यान रखना पड़ता है।
रेलवे के परिचालन विभाग, वाणिज्य विभाग, Electrical Department तथा Mechanical Department सभी इस वर्गीकरण प्रणाली का उपयोग करते हैं। इसलिए किसी भी C&W कर्मचारी के लिए कोच कोडों की जानकारी केवल परीक्षा की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि दैनिक कार्य के लिए भी आवश्यक है।
4.2 यात्री कोचों का वर्गीकरण
भारतीय रेल में संचालित सभी यात्री कोच एक जैसे नहीं होते। यात्रियों की यात्रा श्रेणी, दूरी, उपलब्ध सुविधाओं, ट्रेन की प्रकृति तथा परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के कोचों का निर्माण एवं उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि भारतीय रेल ने प्रत्येक कोच को एक विशिष्ट वर्ग (Classification) तथा कोड (Code) प्रदान किया है।
कोच वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य परिचालन, अनुरक्षण, आरक्षण, निर्माण, निरीक्षण तथा अभिलेखीकरण (Documentation) में एकरूपता बनाए रखना है। किसी कोच का कोड देखकर ही रेलवे कर्मचारी उसकी श्रेणी, उपयोग तथा मूल संरचना का प्रारम्भिक अनुमान लगा सकता है।
व्यावहारिक दृष्टि से भारतीय रेल के यात्री कोचों को निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है—
- सामान्य (Non-AC) कोच
- वातानुकूलित (AC) कोच
- विशेष प्रयोजन (Special Purpose) कोच
- सेवा (Service) कोच
आगे इन सभी श्रेणियों का संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा है।
सामान्य (Non-AC) यात्री कोच
Non-AC कोच भारतीय रेल में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले यात्री कोच हैं। इनका उपयोग सामान्य यात्रियों के परिवहन के लिए किया जाता है। इन कोचों में यांत्रिक वेंटिलेशन, खिड़कियाँ, पंखे तथा सामान्य प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध रहती है, जबकि वातानुकूलन की सुविधा नहीं होती।
इन कोचों का अनुरक्षण अपेक्षाकृत सरल होता है क्योंकि इनमें वातानुकूलन उपकरण, एयर डक्ट, पैकेज यूनिट अथवा संबंधित विद्युत नियंत्रण प्रणाली नहीं होती। फिर भी रनिंग गियर, ब्रेक प्रणाली, दरवाजे, खिड़कियाँ, सीटें, शौचालय तथा अन्य सुरक्षा उपकरणों का निरीक्षण समान रूप से आवश्यक होता है।
इस श्रेणी के प्रमुख कोच हैं—
| कोड | कोच का प्रकार |
|---|---|
| GS | General Second Class Coach |
| UR | Unreserved Coach (जहाँ प्रयुक्त हो) |
| SLR / SLRD | Seating-cum-Luggage/Brake Van |
| D | Second Class Sitting Coach |
नोट: विभिन्न रेलवे जोनों एवं नई कोडिंग प्रणाली में कुछ कोडों में परिवर्तन संभव है। विस्तृत कोडिंग प्रणाली का अध्ययन इस अध्याय के आगे के भाग में किया जाएगा।
वातानुकूलित (AC) कोच
यात्रियों को अधिक आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारतीय रेल विभिन्न प्रकार के वातानुकूलित कोचों का संचालन करती है। इन कोचों में एयर-कंडीशनिंग प्रणाली, बेहतर ध्वनि अवरोध (Noise Insulation), सीलबंद खिड़कियाँ, उन्नत प्रकाश व्यवस्था तथा अनेक अतिरिक्त सुविधाएँ उपलब्ध रहती हैं।
C&W विभाग की दृष्टि से इन कोचों का अनुरक्षण सामान्य कोचों की अपेक्षा अधिक समन्वित होता है क्योंकि इनके यांत्रिक अनुरक्षण के साथ-साथ Electrical Department द्वारा वातानुकूलन प्रणाली का अनुरक्षण भी किया जाता है।
प्रमुख AC कोच निम्नलिखित हैं—
| कोड | कोच का प्रकार |
|---|---|
| 1A | First AC |
| 2A | AC Two Tier |
| 3A | AC Three Tier |
| 3E | AC Three Tier Economy |
| CC | AC Chair Car |
| EC | Executive Chair Car |
इन सभी कोचों की संरचना, आंतरिक विन्यास तथा अनुरक्षण आवश्यकताएँ अलग-अलग होती हैं, जिनका विस्तृत अध्ययन आगे संबंधित अध्यायों में किया जाएगा।
विशेष प्रयोजन (Special Purpose) कोच
कुछ कोच यात्रियों के बैठने अथवा शयन व्यवस्था के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि विशेष परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर निर्मित किए जाते हैं। इन्हें सामान्यतः Special Purpose Coaches कहा जाता है।
इनमें प्रमुख हैं—
- Pantry Car
- Parcel Van
- Luggage Van
- Generator Car (EOG)
- Power Car
- Inspection Car
- Tourist Coach
- Military Coach (विशेष परिस्थितियों में)
इन कोचों का अनुरक्षण उनके उपयोग के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के लिए Pantry Car में यांत्रिक अनुरक्षण के अतिरिक्त रसोई से संबंधित अनेक उपकरण भी लगे होते हैं, जबकि Generator Car में विद्युत उत्पादन प्रणाली प्रमुख होती है। इसलिए इनके अनुरक्षण में संबंधित विभागों के साथ समन्वय आवश्यक होता है।
सेवा (Service) कोच
रेल संचालन के दौरान कुछ ऐसे कोच भी उपयोग में लाए जाते हैं जिनका उद्देश्य सीधे यात्रियों का परिवहन नहीं होता। ये कोच परिचालन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक सेवाएँ प्रदान करते हैं।
इस श्रेणी में मुख्यतः निम्न प्रकार के कोच सम्मिलित किए जा सकते हैं—
- Brake Van
- Power Car
- Generator Car
- Inspection Coach
- Accident Relief Coach
- Medical Relief Coach
इन कोचों का अनुरक्षण सामान्य यात्री कोचों से भिन्न हो सकता है क्योंकि इनमें विशेष उपकरण एवं अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्थाएँ लगी होती हैं।
4.3 ICF एवं LHB कोचों का वर्गीकरण
भारतीय रेल में वर्तमान समय में मुख्यतः दो प्रकार के यात्री कोच व्यापक रूप से उपयोग में लाए जाते हैं—ICF Design Coaches तथा LHB Design Coaches। दोनों का उद्देश्य यात्रियों का सुरक्षित परिवहन है, किन्तु उनकी संरचना, निर्माण तकनीक, रनिंग विशेषताएँ, अधिकतम गति, अनुरक्षण पद्धति तथा सुरक्षा मानकों में पर्याप्त अंतर है।
C&W कर्मचारी के लिए यह जानना आवश्यक है कि किसी कोच का अनुरक्षण केवल उसके उपयोग के आधार पर नहीं, बल्कि उसके डिज़ाइन के आधार पर भी निर्धारित होता है। इसलिए निरीक्षण प्रारम्भ करने से पहले यह पहचानना आवश्यक होता है कि संबंधित कोच ICF डिज़ाइन का है अथवा LHB डिज़ाइन का।
ICF Design Coaches
ICF (Integral Coach Factory) डिज़ाइन के कोच अनेक दशकों तक भारतीय रेल के मानक यात्री कोच रहे हैं। इनका निर्माण मुख्यतः चेन्नई स्थित Integral Coach Factory में विकसित डिज़ाइन पर आधारित है।
इन कोचों की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- पारंपरिक भारतीय कोच डिज़ाइन।
- अपेक्षाकृत सरल संरचना।
- व्यापक अनुरक्षण अनुभव उपलब्ध।
- लंबे समय तक अधिकांश मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों में उपयोग।
- वैक्यूम ब्रेक से एयर ब्रेक प्रणाली तक क्रमिक विकास।
यद्यपि आज भी अनेक ICF कोच सेवा में हैं, भारतीय रेल धीरे-धीरे इन्हें आधुनिक LHB कोचों से प्रतिस्थापित कर रही है।
LHB Design Coaches
LHB (Linke Hofmann Busch) डिज़ाइन के कोच आधुनिक यात्री परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। इनका उपयोग विशेष रूप से उच्च गति, बेहतर सुरक्षा तथा अधिक आरामदायक यात्रा के लिए किया जाता है।
इनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- स्टेनलेस स्टील आधारित आधुनिक संरचना।
- उच्च गति पर बेहतर स्थिरता।
- FIAT Bogie का उपयोग।
- Centre Buffer Coupler (CBC)।
- उन्नत Air Brake System।
- दुर्घटना की स्थिति में बेहतर संरचनात्मक सुरक्षा।
LHB कोचों का अनुरक्षण ICF कोचों से कई दृष्टियों से भिन्न होता है। इसलिए C&W कर्मचारियों को दोनों डिज़ाइनों की तकनीकी विशेषताओं का अलग-अलग ज्ञान होना आवश्यक है।
नोट: ICF एवं LHB कोचों का विस्तृत तकनीकी अध्ययन क्रमशः Chapter–5 एवं Chapter–6 में किया जाएगा।
4.4 कोच कोड की मूल अवधारणा
भारतीय रेल में प्रत्येक यात्री कोच को एक निर्धारित कोड (Coach Code) दिया जाता है। यह कोड केवल पहचान के लिए नहीं होता, बल्कि उससे कोच की श्रेणी, उपयोग तथा कई बार उसकी प्रमुख विशेषताओं का भी संकेत मिलता है।
उदाहरण के लिए यदि किसी रेक में GS कोच लगाया गया है, तो C&W कर्मचारी बिना अंदर देखे ही समझ जाता है कि यह सामान्य द्वितीय श्रेणी का कोच है। इसी प्रकार B, A, H, CC, SLR जैसे कोड भी संबंधित कोच की श्रेणी का संकेत देते हैं।
यह प्रणाली रेलवे के सभी विभागों—Operating, Commercial, Mechanical, Electrical तथा Reservation System—में समान रूप से उपयोग की जाती है।
सामान्यतः उपयोग होने वाले कोच कोड
| कोड | कोच का प्रकार |
|---|---|
| GS | General Second Class |
| D | Second Sitting Coach |
| S | Sleeper Class Coach |
| B | AC Three Tier Coach |
| A | AC Two Tier Coach |
| H | First AC Coach |
| HA | First AC cum AC Two Tier |
| CC | AC Chair Car |
| EC | Executive Chair Car |
| SLR | Seating-cum-Luggage Rake / Brake Van |
| EOG | End-On Generator Car |
| HOG | Head-On Generation System से संचालित रेक का संकेत* |
ध्यान दें: HOG वास्तव में पारंपरिक अर्थों में "कोच का प्रकार" नहीं है, बल्कि विद्युत आपूर्ति (Head-On Generation) की प्रणाली को दर्शाता है। फिर भी व्यवहार में कर्मचारी HOG रेक का उल्लेख इसी नाम से करते हैं।
4.5 कोच कोड को समझने का व्यावहारिक महत्व
C&W विभाग में किसी भी रेक का निरीक्षण प्रारम्भ करने से पहले संबंधित कोचों की पहचान करना आवश्यक होता है। प्रत्येक प्रकार के कोच में लगाए गए उपकरण, यात्रियों की क्षमता, ब्रेक व्यवस्था, विद्युत प्रणाली तथा अनुरक्षण आवश्यकताएँ अलग-अलग हो सकती हैं।
उदाहरण के लिए—
- GS कोच में सामान्य बैठने की व्यवस्था होती है।
- S कोच में शयन व्यवस्था होती है।
- B कोच में वातानुकूलित त्रि-स्तरीय शयन व्यवस्था रहती है।
- A कोच में द्वि-स्तरीय वातानुकूलित व्यवस्था होती है।
- SLR कोच में यात्रियों के अतिरिक्त लगेज एवं ब्रेक वैन की व्यवस्था होती है।
- Generator Car में विद्युत उत्पादन संबंधी उपकरण लगे होते हैं।
यदि निरीक्षण के समय कोच की सही पहचान न हो, तो संबंधित निरीक्षण बिंदुओं की अनदेखी होने की संभावना रहती है। इसलिए C&W कर्मचारी के लिए कोच कोड की जानकारी केवल सैद्धांतिक विषय नहीं, बल्कि दैनिक कार्य का आधार है।
4.6 विशेष प्रयोजन (Special Purpose) कोच
भारतीय रेल में सभी कोच यात्रियों के बैठने अथवा शयन व्यवस्था के लिए ही निर्मित नहीं होते। कुछ कोच ऐसे होते हैं जिनका निर्माण विशेष परिचालन आवश्यकताओं, तकनीकी सेवाओं अथवा सहायक सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया जाता है। इन्हें सामान्यतः Special Purpose Coaches कहा जाता है।
इन कोचों की बाहरी संरचना सामान्य यात्री कोचों से मिलती-जुलती हो सकती है, किन्तु इनके भीतर की व्यवस्था, उपकरण तथा उपयोग पूर्णतः भिन्न होते हैं। C&W विभाग के लिए ऐसे कोचों का अनुरक्षण विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इनमें सामान्य कोचों की तुलना में अतिरिक्त यांत्रिक एवं तकनीकी उपकरण लगे होते हैं।
प्रमुख विशेष प्रयोजन कोच निम्नलिखित हैं—
| कोच का प्रकार | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| Pantry Car | भोजन तैयार करने एवं वितरित करने हेतु |
| Luggage/Parcel Van | सामान एवं पार्सल परिवहन |
| Brake Van | गार्ड के कार्य एवं सुरक्षा उपकरण |
| Generator Car (EOG) | विद्युत उत्पादन |
| Power Car | विद्युत आपूर्ति एवं सहायक उपकरण |
| Inspection Car | रेलवे अधिकारियों के निरीक्षण हेतु |
| Accident Relief Coach | दुर्घटना राहत कार्य |
| Medical Relief Coach | चिकित्सकीय सहायता |
इन कोचों का अनुरक्षण केवल C&W विभाग तक सीमित नहीं होता। आवश्यकता के अनुसार Electrical, S&T तथा अन्य संबंधित विभाग भी इसमें भाग लेते हैं।
4.7 कोच नंबरिंग प्रणाली का परिचय
भारतीय रेल के प्रत्येक कोच को एक विशिष्ट संख्या (Unique Coach Number) प्रदान की जाती है। यह संख्या केवल पहचान के लिए नहीं होती, बल्कि उससे उस कोच का रिकॉर्ड, अनुरक्षण इतिहास, निर्माण संबंधी जानकारी तथा परिचालन विवरण भी प्राप्त किया जा सकता है।
जब किसी कोच को निर्माण इकाई से सेवा में भेजा जाता है, तभी उसे एक स्थायी पहचान संख्या प्रदान की जाती है। यही संख्या उसके पूरे सेवा जीवन में उपयोग की जाती है। अनुरक्षण रिकॉर्ड, POH, ROH, दुर्घटना जाँच, निरीक्षण रिपोर्ट, स्पेयर पार्ट्स इतिहास तथा अन्य सभी तकनीकी अभिलेख इसी संख्या के आधार पर संधारित किए जाते हैं।
C&W कर्मचारियों के लिए कोच संख्या का सही उल्लेख अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि निरीक्षण रिपोर्ट या Sick Memo में गलत संख्या दर्ज कर दी जाए, तो संबंधित कोच का अनुरक्षण इतिहास प्रभावित हो सकता है तथा भविष्य में तकनीकी रिकॉर्ड में भ्रम उत्पन्न हो सकता है।
आधुनिक भारतीय रेल में अधिकांश अनुरक्षण गतिविधियाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दर्ज की जाती हैं। इसलिए सही कोच संख्या का उपयोग पहले की अपेक्षा और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
नोट: कोच नंबरिंग प्रणाली, कोच मार्किंग, UIC नंबरिंग तथा विभिन्न निर्माण इकाइयों की पहचान का विस्तृत अध्ययन आगे एक पृथक अध्याय में किया जाएगा।
4.8 C&W कर्मचारी के लिए कोच पहचान का महत्व
C&W विभाग में कार्य करने वाले किसी भी कर्मचारी के लिए कोच की सही पहचान करना पहला तकनीकी कदम होता है। निरीक्षण प्रारम्भ करने से पहले यह जानना आवश्यक होता है कि संबंधित कोच—
- ICF है या LHB,
- AC है या Non-AC,
- सामान्य यात्री कोच है या विशेष प्रयोजन का,
- नियमित सेवा में है या विशेष उपयोग के लिए निर्मित है।
इसी जानकारी के आधार पर निरीक्षण की प्रक्रिया, अनुरक्षण बिंदु, आवश्यक उपकरण तथा परीक्षण विधि निर्धारित होती है।
उदाहरण के लिए, यदि किसी AC कोच का निरीक्षण किया जा रहा है, तो सामान्य यांत्रिक निरीक्षण के अतिरिक्त एयर-कंडीशनिंग प्रणाली से संबंधित समन्वय भी आवश्यक होगा। इसी प्रकार Generator Car अथवा Pantry Car के निरीक्षण में सामान्य यात्री कोचों की तुलना में कई अतिरिक्त बिंदुओं पर ध्यान देना पड़ता है।
इस प्रकार कोच की सही पहचान केवल परिचालन सुविधा नहीं, बल्कि प्रभावी अनुरक्षण तथा सुरक्षित रेल संचालन की मूल आवश्यकता है।
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