इस अध्याय में
5.1 ICF Design का परिचय
5.2 ICF Coach का विकास
5.3 ICF Coach की मुख्य विशेषताएँ
5.4 ICF Coach की संरचना
5.5 प्रमुख यांत्रिक अवयव
5.6 ICF Coach की अनुरक्षण व्यवस्था
5.7 प्रमुख लाभ एवं सीमाएँ
5.1 ICF Design का परिचय
भारतीय रेल के इतिहास में ICF Design Coach का विशेष स्थान है। लगभग छह दशकों तक यही डिज़ाइन भारतीय रेल के अधिकांश यात्री कोचों का आधार रहा। देश के लगभग प्रत्येक रेलवे जोन में मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर तथा अनेक विशेष ट्रेनों का संचालन ICF डिज़ाइन कोचों के माध्यम से किया जाता रहा। यद्यपि वर्तमान समय में इनका स्थान धीरे-धीरे LHB डिज़ाइन कोच ले रहे हैं, फिर भी बड़ी संख्या में ICF कोच आज भी सेवा में हैं। इसलिए C&W विभाग के प्रत्येक कर्मचारी के लिए इनकी संरचना एवं अनुरक्षण प्रणाली का ज्ञान आवश्यक है।
ICF का पूर्ण रूप Integral Coach Factory है। यह चेन्नई (तमिलनाडु) स्थित भारतीय रेल की प्रमुख कोच निर्माण इकाई है। इसी कारखाने में विकसित डिज़ाइन के कारण इन कोचों को सामान्यतः ICF Design Coach कहा जाता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि सभी ICF डिज़ाइन कोच आवश्यक नहीं कि केवल ICF, चेन्नई में ही निर्मित हुए हों। बाद में अन्य उत्पादन इकाइयों, जैसे Rail Coach Factory (RCF), कपूरथला तथा Modern Coach Factory (MCF), रायबरेली ने भी इसी मूल डिज़ाइन पर आधारित अनेक कोचों का निर्माण किया। इसलिए ICF यहाँ मुख्यतः एक Design Philosophy को दर्शाता है, केवल निर्माण स्थल को नहीं।
ICF डिज़ाइन के विकास का मुख्य उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत, हल्के तथा मानकीकृत यात्री कोच उपलब्ध कराना था। इससे पहले उपयोग किए जाने वाले कोचों की तुलना में यह डिज़ाइन अधिक आधुनिक था और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त भी। इस डिज़ाइन ने भारतीय रेल को स्वदेशी कोच निर्माण की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ICF कोचों की संरचना इस प्रकार विकसित की गई कि वे विभिन्न जलवायु परिस्थितियों, लंबी दूरी की यात्राओं तथा अधिक यात्री घनत्व वाली सेवाओं में भी प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। समय-समय पर इनमें अनेक सुधार किए गए, जैसे एयर ब्रेक प्रणाली का समावेश, सेंटर बफर कपलर (जहाँ लागू), बेहतर सस्पेंशन, उन्नत आंतरिक विन्यास तथा आधुनिक यात्री सुविधाएँ। इन सुधारों के बावजूद मूल ICF डिज़ाइन लंबे समय तक लगभग समान रहा।
C&W विभाग की दृष्टि से ICF कोचों का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारतीय रेल की वर्तमान अनुरक्षण प्रणाली का बड़ा भाग इन्हीं कोचों के अनुभव के आधार पर विकसित हुआ है। निरीक्षण पद्धतियाँ, डिपो अनुरक्षण, ROH एवं POH प्रक्रियाएँ, विभिन्न निरीक्षण अनुसूचियाँ तथा अनेक मानक निर्देश प्रारम्भ में ICF डिज़ाइन को ध्यान में रखकर विकसित किए गए थे। इसलिए इस डिज़ाइन को समझे बिना भारतीय रेल की कोच अनुरक्षण प्रणाली को पूर्ण रूप से समझना संभव नहीं है।
5.2 ICF Design का विकास
स्वतंत्रता के बाद भारतीय रेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—तेजी से बढ़ती यात्री संख्या के लिए पर्याप्त कोच उपलब्ध कराना। प्रारम्भिक वर्षों में कोचों के निर्माण के लिए विदेशों पर निर्भरता अधिक थी, जिससे लागत, आपूर्ति तथा तकनीकी विकास—तीनों प्रभावित होते थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए भारत सरकार ने देश में ही आधुनिक कोच निर्माण की व्यवस्था विकसित करने का निर्णय लिया।
इस उद्देश्य से चेन्नई में Integral Coach Factory (ICF) की स्थापना की गई। प्रारम्भिक चरण में विदेशी तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ, परंतु शीघ्र ही भारतीय अभियंताओं ने इस तकनीक को अपनाकर उसमें अनेक सुधार किए। परिणामस्वरूप भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक ऐसा मानकीकृत कोच विकसित हुआ, जिसका उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा सकता था और जिसका अनुरक्षण भी अपेक्षाकृत सरल था।
ICF डिज़ाइन की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसका मानकीकरण (Standardization) था। समान प्रकार के कोचों में अधिकांश प्रमुख यांत्रिक अवयवों का डिज़ाइन लगभग एक जैसा रखा गया, जिससे स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, अनुरक्षण प्रक्रिया तथा कर्मचारियों के प्रशिक्षण में अत्यधिक सुविधा हुई। यही कारण है कि ICF डिज़ाइन कई दशकों तक भारतीय रेल का मानक यात्री कोच बना रहा।
5.3 ICF डिज़ाइन कोच की प्रमुख विशेषताएँ
ICF डिज़ाइन कोच भारतीय रेल की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए मानकीकृत (Standardized) यात्री कोच हैं। इनका निर्माण इस प्रकार किया गया कि ये विभिन्न जलवायु परिस्थितियों, अलग-अलग रेलमार्गों तथा विविध परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवा प्रदान कर सकें। अनेक दशकों तक भारतीय रेल की अधिकांश मेल, एक्सप्रेस एवं यात्री गाड़ियाँ इसी डिज़ाइन के कोचों से संचालित होती रहीं।
ICF डिज़ाइन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी Integral All Steel Construction है। इसमें कोच की बॉडी, छत, साइड वॉल तथा अंडरफ्रेम एक समन्वित संरचना के रूप में कार्य करते हैं। इस प्रकार की संरचना से कोच की मजबूती बढ़ती है, भार का वितरण समान रूप से होता है तथा परिचालन के दौरान उत्पन्न यांत्रिक बलों को सुरक्षित रूप से वहन किया जा सकता है।
इन कोचों में सामान्यतः दो बोगियाँ होती हैं तथा प्रत्येक बोगी में दो-दो Wheel Set लगे होते हैं। बोगी, सस्पेंशन एवं ब्रेक प्रणाली का डिज़ाइन इस प्रकार विकसित किया गया है कि सामान्य गति पर कोच स्थिर, संतुलित तथा सुरक्षित रूप से संचालित हो सके।
समय-समय पर ICF डिज़ाइन में अनेक सुधार किए गए। प्रारम्भिक कोचों में प्रयुक्त वैक्यूम ब्रेक प्रणाली को धीरे-धीरे एयर ब्रेक प्रणाली से प्रतिस्थापित किया गया। इसी प्रकार स्क्रू कपलिंग की जगह कई रेकों में Centre Buffer Coupler (CBC) का उपयोग प्रारम्भ हुआ। इन परिवर्तनों से सुरक्षा, परिचालन क्षमता तथा अनुरक्षण प्रणाली में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
यद्यपि वर्तमान समय में LHB डिज़ाइन को प्राथमिकता दी जा रही है, फिर भी भारतीय रेल में बड़ी संख्या में ICF कोच अभी भी सेवा में हैं। इसलिए इनकी संरचना, निरीक्षण एवं अनुरक्षण का ज्ञान C&W कर्मचारियों के लिए आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ICF डिज़ाइन कोच की प्रमुख विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| निर्माण प्रकार | Integral All Steel Construction |
| बोगी | सामान्यतः 2 |
| प्रत्येक बोगी में Wheel Set | 2 |
| ब्रेक प्रणाली | Air Brake (वर्तमान में अधिकांश) |
| कपलिंग | Screw Coupling / CBC (जहाँ लागू) |
| उपयोग | मेल, एक्सप्रेस, पैसेंजर एवं विशेष ट्रेनें |
| अनुरक्षण | निर्धारित Schedule के अनुसार Depot, ROH एवं POH |
नोट: विभिन्न निर्माण वर्षों एवं संशोधनों के अनुसार कुछ तकनीकी विशेषताओं में अंतर हो सकता है।
5.4 ICF कोच की संरचना
किसी भी ICF कोच की संरचना को समझना C&W विभाग के प्रत्येक कर्मचारी के लिए आवश्यक है, क्योंकि अनुरक्षण के दौरान प्रत्येक निरीक्षण इसी संरचना के आधार पर किया जाता है। यद्यपि विभिन्न प्रकार के ICF कोचों में आंतरिक व्यवस्था अलग हो सकती है, फिर भी उनकी मूल संरचना लगभग समान रहती है।
तकनीकी दृष्टि से किसी ICF कोच को निम्नलिखित प्रमुख भागों में विभाजित किया जा सकता है—
| प्रमुख भाग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Body Shell | यात्रियों एवं उपकरणों के लिए मुख्य संरचना |
| Underframe | सम्पूर्ण कोच का आधार एवं भार वहन |
| Bogie | रनिंग, भार वितरण एवं स्थिरता |
| Wheel & Axle | रेलपथ पर सुरक्षित गति |
| Suspension | झटकों एवं कंपन का नियंत्रण |
| Brake System | गति नियंत्रण एवं सुरक्षित रोकना |
| Coupling Arrangement | कोचों को जोड़ना |
| Buffing Arrangement | झटकों का अवशोषण (जहाँ लागू) |
| Interior Fittings | यात्रियों की सुविधा हेतु उपकरण |
Body Shell
Body Shell कोच का मुख्य संरचनात्मक भाग है। इसमें छत (Roof), दोनों साइड वॉल, एंड वॉल तथा फर्श (Floor Structure) सम्मिलित होते हैं। यही भाग यात्रियों के बैठने, शयन व्यवस्था, प्रकाश, पंखे, खिड़कियाँ, दरवाजे एवं अन्य आंतरिक सुविधाओं को धारण करता है।
Body Shell का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि वह स्वयं का भार, यात्रियों का भार तथा परिचालन के दौरान उत्पन्न विभिन्न यांत्रिक बलों को सुरक्षित रूप से सहन कर सके।
Underframe
Underframe सम्पूर्ण कोच की आधारभूत संरचना है। Body Shell इसी पर स्थापित रहती है तथा Bogie भी इसी से जुड़ी होती हैं।
इसके मुख्य कार्य हैं—
- सम्पूर्ण भार को वहन करना।
- Bogie से प्राप्त बलों को वितरित करना।
- ब्रेकिंग एवं ट्रैक्शन बलों को सुरक्षित रूप से सहन करना।
- विभिन्न उपकरणों को सहारा प्रदान करना।
Underframe की नियमित जाँच C&W अनुरक्षण का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है क्योंकि किसी भी प्रकार की दरार, मुड़ाव अथवा संरचनात्मक क्षति सीधे कोच की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है।
Bogie
ICF कोच में प्रयुक्त Bogie वाहन का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव है। यही पहियों, एक्सल, सस्पेंशन तथा ब्रेक प्रणाली को धारण करती है और कोच को रेलपथ पर संतुलित रूप से चलने में सहायता प्रदान करती है।
बोगी का मुख्य कार्य केवल भार वहन करना नहीं है, बल्कि—
- रनिंग स्थिरता बनाए रखना।
- मोड़ों पर सुरक्षित गति सुनिश्चित करना।
- झटकों एवं कंपन को नियंत्रित करना।
- ब्रेक बल को Wheel Set तक पहुँचाना।
ICF बोगी की संरचना, निरीक्षण एवं अनुरक्षण का विस्तृत अध्ययन आगे अलग अध्याय में किया जाएगा।
Wheel Set एवं Axle
Wheel Set किसी भी ICF कोच का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव है। एक Wheel Set दो पहियों (Wheels) तथा उन्हें जोड़ने वाले एक ठोस एक्सल (Solid Axle) से मिलकर बनता है। यही सम्पूर्ण कोच का भार रेलपथ तक पहुँचाता है तथा कोच को सुरक्षित गति प्रदान करता है।
प्रत्येक ICF कोच में सामान्यतः दो बोगियाँ होती हैं तथा प्रत्येक बोगी में दो Wheel Set लगे होते हैं। इस प्रकार एक मानक ICF कोच में कुल चार Wheel Set कार्य करते हैं। प्रत्येक Wheel Set का निर्माण अत्यंत उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात से किया जाता है ताकि वह निरंतर गतिशील भार, ब्रेकिंग बल तथा ट्रैक से उत्पन्न होने वाले झटकों को सुरक्षित रूप से सहन कर सके।
Wheel Profile, Wheel Diameter, Flange Thickness तथा Axle की स्थिति का नियमित निरीक्षण C&W अनुरक्षण का महत्वपूर्ण भाग है। पहियों का अत्यधिक घिसाव (Wear), Wheel Flat, Shelling, Flange Wear अथवा Axle में किसी प्रकार की दरार (Crack) परिचालन सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए निर्धारित निरीक्षण कार्यक्रमों के अनुसार इनकी जाँच की जाती है तथा आवश्यक होने पर Wheel Set बदला जाता है।
Suspension System
ICF कोच की रनिंग गुणवत्ता मुख्यतः उसकी Suspension System पर निर्भर करती है। यात्रा के दौरान ट्रैक से उत्पन्न होने वाले झटके एवं कंपन सीधे कोच बॉडी तक न पहुँचें, इसके लिए सस्पेंशन प्रणाली का उपयोग किया जाता है।
ICF कोच में प्रयुक्त सस्पेंशन प्रणाली का मुख्य उद्देश्य है—
- झटकों का अवशोषण।
- यात्रियों को आरामदायक यात्रा प्रदान करना।
- बोगी एवं बॉडी के बीच संतुलन बनाए रखना।
- पहियों का ट्रैक से उचित संपर्क बनाए रखना।
यदि सस्पेंशन प्रणाली सही स्थिति में न हो, तो कोच की रनिंग अस्थिर हो सकती है, यात्रियों को अधिक झटके महसूस हो सकते हैं तथा पहियों एवं ट्रैक दोनों का घिसाव बढ़ सकता है।
स्प्रिंग, शॉक एब्जॉर्बर (जहाँ लागू), इक्वलाइजिंग व्यवस्था तथा अन्य संबंधित अवयवों का निरीक्षण निर्धारित अनुरक्षण कार्यक्रम के अनुसार किया जाता है।
Brake Gear
ICF कोच में Brake Gear वह सम्पूर्ण यांत्रिक व्यवस्था है जिसके माध्यम से Brake Cylinder द्वारा उत्पन्न बल पहियों तक पहुँचाया जाता है। इसमें Brake Lever, Pull Rod, Hanger, Brake Block Holder, Brake Block तथा अन्य अनेक यांत्रिक अवयव सम्मिलित होते हैं।
ब्रेक प्रणाली तभी प्रभावी ढंग से कार्य करती है जब Brake Gear के सभी भाग सही समायोजन (Adjustment) में हों तथा उनमें अत्यधिक घिसाव या ढीलापन न हो।
निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है—
- Brake Block की मोटाई।
- Brake Rigging की स्थिति।
- Lever एवं Pin में घिसाव।
- Split Pin एवं Safety Arrangement।
- Brake Binding अथवा Excessive Clearance।
Brake Gear में किसी भी प्रकार की खराबी सीधे Brake Power को प्रभावित करती है। इसलिए इसका निरीक्षण प्रत्येक Train Examination तथा निर्धारित Maintenance Schedule का अनिवार्य भाग है।
Coupling Arrangement
ICF कोचों में विभिन्न समयों पर अलग-अलग प्रकार की कपलिंग व्यवस्थाओं का उपयोग किया गया है। प्रारम्भिक कोचों में मुख्यतः Screw Coupling एवं Side Buffer व्यवस्था प्रचलित थी। बाद में अनेक रेकों में सुरक्षा एवं परिचालन क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से Centre Buffer Coupler (CBC) अपनाया गया।
Coupling Arrangement का मुख्य कार्य केवल दो कोचों को जोड़ना नहीं है। यह ट्रैक्शन (खींचने) तथा Buffing (धक्का लगने) के दौरान उत्पन्न बलों को सुरक्षित रूप से एक कोच से दूसरे कोच तक पहुँचाता है।
Coupler का निरीक्षण करते समय निम्न बिंदुओं की जाँच की जाती है—
- Coupler Body में Crack।
- Coupling Height।
- Locking Mechanism।
- Wear Limit।
- Draft Gear की स्थिति।
यदि Coupler में निर्धारित सीमा से अधिक घिसाव या कोई संरचनात्मक दोष पाया जाता है, तो उसे तत्काल बदलना आवश्यक होता है।
Interior Fittings
यात्री सुविधा से संबंधित सभी उपकरणों को सामूहिक रूप से Interior Fittings कहा जाता है। यद्यपि इनका अधिकांश भाग Mechanical एवं Electrical दोनों विभागों से संबंधित होता है, फिर भी C&W विभाग इनके कई महत्वपूर्ण पहलुओं का निरीक्षण करता है।
इनमें मुख्यतः निम्न उपकरण सम्मिलित होते हैं—
- सीट एवं बर्थ
- दरवाजे एवं लॉक
- खिड़कियाँ
- शौचालय की यांत्रिक फिटिंग
- वॉटर टैंक सपोर्ट
- फर्श (Flooring)
- हैंड ग्रिप एवं फुट स्टेप
- वेस्टिब्यूल (जहाँ लागू)
यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन सभी उपकरणों की स्थिति प्रत्येक निर्धारित निरीक्षण के दौरान देखी जाती है।
5.5 ICF कोच का अनुरक्षण (Maintenance)
किसी भी ICF कोच की सेवा आयु, सुरक्षा एवं विश्वसनीयता उसके अनुरक्षण की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। भारतीय रेल में ICF कोचों के अनुरक्षण के लिए निर्धारित निरीक्षण कार्यक्रम (Maintenance Schedule) लागू किए जाते हैं। इनका उद्देश्य केवल खराबी दूर करना नहीं, बल्कि संभावित दोषों को समय रहते पहचानकर उनका निराकरण करना भी है।
ICF कोच का अनुरक्षण सामान्यतः विभिन्न स्तरों पर किया जाता है, जैसे—
| अनुरक्षण स्तर | उद्देश्य |
|---|---|
| Trip / Train Examination | परिचालन से पूर्व एवं पश्चात आवश्यक निरीक्षण |
| Primary Maintenance | रेक को अगली यात्रा हेतु तैयार करना |
| Secondary Maintenance | विस्तृत डिपो अनुरक्षण |
| ROH | निर्धारित अवधि पर विस्तृत अनुरक्षण |
| POH | कार्यशाला स्तर पर व्यापक निरीक्षण एवं ओवरहॉल |
प्रत्येक स्तर पर निरीक्षण की प्रक्रिया, जाँच बिंदु तथा स्वीकृति मानक अलग-अलग होते हैं। किसी भी कोच को सेवा में लगाने से पूर्व यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी सुरक्षा संबंधी अवयव निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य कर रहे हों।
ICF कोचों के अनुरक्षण में विशेष ध्यान निम्नलिखित बिंदुओं पर दिया जाता है—
- Wheel एवं Axle की स्थिति।
- Roller Bearing का निरीक्षण।
- Brake System की कार्यक्षमता।
- Suspension की स्थिति।
- Underframe एवं Body Shell में दरार या विकृति।
- Coupler एवं Draft Gear।
- Safety Fittings।
- Interior Condition।
इन सभी निरीक्षणों का उद्देश्य सुरक्षित, विश्वसनीय एवं समयबद्ध रेल संचालन सुनिश्चित करना है।
5.6 ICF डिज़ाइन कोच के प्रमुख लाभ
भारतीय रेल में ICF डिज़ाइन कोचों का उपयोग कई दशकों तक बड़े पैमाने पर किया गया। इसका मुख्य कारण केवल इनका सफल निर्माण नहीं था, बल्कि इनकी विश्वसनीयता, सरल अनुरक्षण व्यवस्था तथा भारतीय परिचालन परिस्थितियों के अनुरूप उनकी उपयुक्तता भी थी। लंबे समय तक प्राप्त परिचालन अनुभव के आधार पर इन कोचों ने भारतीय रेल की यात्री सेवाओं को एक स्थिर तकनीकी आधार प्रदान किया।
ICF डिज़ाइन कोचों के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं—
सरल एवं मानकीकृत संरचना
ICF कोचों की संरचना अपेक्षाकृत सरल तथा मानकीकृत है। अधिकांश यांत्रिक अवयवों का डिज़ाइन वर्षों तक लगभग समान रहा, जिससे अनुरक्षण कार्य व्यवस्थित एवं सुविधाजनक बना। स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता तथा कर्मचारियों का प्रशिक्षण भी इसी कारण अपेक्षाकृत सरल रहा।
व्यापक अनुरक्षण अनुभव
भारतीय रेल के अधिकांश C&W डिपो, कार्यशालाएँ तथा प्रशिक्षण संस्थान लंबे समय तक ICF डिज़ाइन पर आधारित रहे हैं। परिणामस्वरूप इस डिज़ाइन के निरीक्षण, दोष पहचान तथा अनुरक्षण के संबंध में व्यापक व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध है। यही कारण है कि अधिकांश अनुरक्षण प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित रूप से विकसित हो सकीं।
स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता
लंबे समय तक बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के कारण ICF कोचों के अधिकांश स्पेयर पार्ट्स रेलवे प्रणाली में आसानी से उपलब्ध रहे। इससे अनुरक्षण कार्य में निरंतरता बनी रही तथा मरम्मत का समय कम हुआ।
भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल
ICF कोचों का डिज़ाइन भारतीय जलवायु, लंबी दूरी की यात्राओं तथा विविध परिचालन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया था। इसलिए ये कोच देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी रूप से संचालित होते रहे।
5.7 ICF डिज़ाइन कोचों की सीमाएँ
तकनीकी विकास एक सतत प्रक्रिया है। जिस प्रकार ICF डिज़ाइन अपने समय में आधुनिक माना जाता था, उसी प्रकार समय के साथ नई आवश्यकताओं के कारण इसकी कुछ सीमाएँ भी स्पष्ट हुईं। यही सीमाएँ आगे चलकर LHB डिज़ाइन को अपनाने का प्रमुख कारण बनीं।
उच्च गति पर सीमाएँ
ICF कोच सामान्य परिचालन गति के लिए उपयुक्त हैं, किन्तु उच्च गति पर उनकी रनिंग गुणवत्ता तथा स्थिरता आधुनिक LHB कोचों की तुलना में कम मानी जाती है। यही कारण है कि तेज गति वाली नई ट्रेनों में LHB डिज़ाइन को प्राथमिकता दी जा रही है।
पुरानी बोगी तकनीक
ICF कोचों में प्रयुक्त बोगी डिज़ाइन अपने समय के लिए प्रभावी था, परंतु आधुनिक उच्च गति एवं बेहतर Ride Quality की आवश्यकताओं की तुलना में इसमें सीमाएँ हैं। बाद में विकसित FIAT Bogie ने इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सुधार प्रदान किए।
संरचनात्मक सुरक्षा
आधुनिक रेलवे सुरक्षा मानकों के अनुसार दुर्घटना की स्थिति में कोच की संरचनात्मक क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। LHB डिज़ाइन में प्रयुक्त Anti-Climbing एवं Anti-Telescopic विशेषताओं की तुलना में पारंपरिक ICF डिज़ाइन अपेक्षाकृत कम उन्नत माना जाता है।
अधिक अनुरक्षण आवश्यकता
लंबे समय तक सेवा में रहने के कारण अनेक ICF कोचों में नियमित अनुरक्षण की आवश्यकता अपेक्षाकृत अधिक होती है। यद्यपि निर्धारित निरीक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से इन्हें सुरक्षित रखा जाता है, फिर भी आधुनिक डिज़ाइनों की तुलना में इनकी अनुरक्षण आवश्यकताएँ कुछ अधिक हो सकती हैं।
आधुनिक भारतीय रेल में ICF कोचों की स्थिति
भारतीय रेल वर्तमान में चरणबद्ध तरीके से ICF डिज़ाइन कोचों के स्थान पर LHB डिज़ाइन कोचों का विस्तार कर रही है। नई मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों में अधिकांशतः LHB कोचों का उपयोग किया जा रहा है तथा पुराने ICF रेकों को क्रमिक रूप से प्रतिस्थापित किया जा रहा है।
फिर भी बड़ी संख्या में ICF कोच अभी भी विभिन्न रेल सेवाओं में कार्यरत हैं। इसलिए C&W कर्मचारियों के लिए इनकी संरचना, अनुरक्षण प्रणाली तथा निरीक्षण प्रक्रियाओं का ज्ञान आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना पहले था।
यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि किसी भी कोच की सुरक्षा केवल उसके डिज़ाइन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि निर्धारित अनुरक्षण, समय पर निरीक्षण तथा मानकों के अनुरूप मरम्मत पर भी समान रूप से निर्भर करती है। एक सुव्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली के अंतर्गत ICF कोच सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवा प्रदान करते हैं।
No comments:
Post a Comment