इस अध्याय में
12.1 कपलिंग प्रणाली का परिचय
रेलवे में किसी भी रेलगाड़ी का निर्माण अनेक कोचों अथवा वैगनों को एक निश्चित क्रम में जोड़कर किया जाता है। इन सभी को सुरक्षित रूप से जोड़ने वाली यांत्रिक व्यवस्था को कपलिंग प्रणाली (Coupling System) कहा जाता है।
कपलिंग प्रणाली का कार्य केवल दो कोचों को जोड़ना ही नहीं है, बल्कि उनके बीच उत्पन्न खींचने वाले बल (Draft Force) तथा धक्का देने वाले बल (Buff Force) को सुरक्षित रूप से एक कोच से दूसरे कोच तक पहुँचाना भी है। इसके अतिरिक्त यह प्रणाली ब्रेकिंग, त्वरण (Acceleration), ढाल (Gradient) तथा वक्र पथ (Curves) पर भी पूरी रेक की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रेलवे के विकास के साथ-साथ ट्रेनों की गति, भार वहन क्षमता तथा सुरक्षा आवश्यकताओं में निरंतर वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप कपलिंग प्रणालियों में भी समय-समय पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। प्रारम्भिक Link एवं Pin Coupler से लेकर Screw Coupler, Centre Buffer Coupler (CBC), Semi-Permanent Coupler तथा आधुनिक Scharfenberg Automatic Coupler तक का विकास इसी आवश्यकता का परिणाम है।
आज भारतीय रेलवे में अधिकांश नई यात्री कोचों तथा उच्च क्षमता वाले माल डिब्बों में Centre Buffer Coupler (CBC) मानक प्रणाली के रूप में प्रयुक्त हो रही है। वहीं Vande Bharat जैसी Trainset आधारित ट्रेनों में Semi-Permanent तथा Automatic Coupler का उपयोग किया जा रहा है।