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अध्याय–12 रेलवे कोच कपलिंग प्रणाली (Railway Coach Coupling System) Screw Coupler से आधुनिक Automatic Coupler तक

 इस अध्याय में

12.1 कपलिंग प्रणाली का परिचय
12.2 रेलवे कपलिंग प्रणाली का विकास
12.3 Screw Coupler एवं Side Buffer System
12.4 Transition Coupler (संक्रमण कपलर)
12.5 Centre Buffer Coupler (CBC)
12.6 Semi-Permanent Coupler (SPC)
12.7 Scharfenberg Automatic Coupler
12.8 Draft Gear एवं Energy Absorption System
12.9 Coupling एवं Uncoupling की प्रक्रिया
12.10 निरीक्षण एवं अनुरक्षण
12.11 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ
12.12 Fault Diagnosis Table एवं Chapter Summary

12.1 कपलिंग प्रणाली का परिचय

रेलवे में किसी भी रेलगाड़ी का निर्माण अनेक कोचों अथवा वैगनों को एक निश्चित क्रम में जोड़कर किया जाता है। इन सभी को सुरक्षित रूप से जोड़ने वाली यांत्रिक व्यवस्था को कपलिंग प्रणाली (Coupling System) कहा जाता है।

कपलिंग प्रणाली का कार्य केवल दो कोचों को जोड़ना ही नहीं है, बल्कि उनके बीच उत्पन्न खींचने वाले बल (Draft Force) तथा धक्का देने वाले बल (Buff Force) को सुरक्षित रूप से एक कोच से दूसरे कोच तक पहुँचाना भी है। इसके अतिरिक्त यह प्रणाली ब्रेकिंग, त्वरण (Acceleration), ढाल (Gradient) तथा वक्र पथ (Curves) पर भी पूरी रेक की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रेलवे के विकास के साथ-साथ ट्रेनों की गति, भार वहन क्षमता तथा सुरक्षा आवश्यकताओं में निरंतर वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप कपलिंग प्रणालियों में भी समय-समय पर महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। प्रारम्भिक Link एवं Pin Coupler से लेकर Screw Coupler, Centre Buffer Coupler (CBC), Semi-Permanent Coupler तथा आधुनिक Scharfenberg Automatic Coupler तक का विकास इसी आवश्यकता का परिणाम है।

आज भारतीय रेलवे में अधिकांश नई यात्री कोचों तथा उच्च क्षमता वाले माल डिब्बों में Centre Buffer Coupler (CBC) मानक प्रणाली के रूप में प्रयुक्त हो रही है। वहीं Vande Bharat जैसी Trainset आधारित ट्रेनों में Semi-Permanent तथा Automatic Coupler का उपयोग किया जा रहा है।

अध्याय–11 रेलवे कोच सस्पेंशन प्रणाली (Railway Coach Suspension System) संरचना, कार्यप्रणाली, निरीक्षण एवं अनुरक्षण

 

इस अध्याय में

11.1 सस्पेंशन प्रणाली का परिचय
11.2 सस्पेंशन प्रणाली की आवश्यकता
11.3 सस्पेंशन प्रणाली के सिद्धांत
11.4 सस्पेंशन प्रणाली के प्रमुख अवयव
11.5 Primary एवं Secondary Suspension
11.6 कार्यप्रणाली (Working Principle)
11.7 निरीक्षण एवं अनुरक्षण
11.8 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

11.1 सस्पेंशन प्रणाली का परिचय

रेलवे कोच की सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा केवल Wheel, Bogie अथवा Brake System पर निर्भर नहीं करती। यदि कोच में उपयुक्त Suspension System न हो, तो रेलपथ की प्रत्येक अनियमितता, झटका तथा कंपन सीधे कोच की बॉडी तक पहुँच जाएगा। ऐसी स्थिति में न केवल यात्रियों को असुविधा होगी, बल्कि कोच के विभिन्न यांत्रिक अवयवों पर भी अतिरिक्त तनाव उत्पन्न होगा।

इन्हीं समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए रेलवे कोचों में Suspension System (निलंबन प्रणाली) का उपयोग किया जाता है।

Suspension System एक ऐसी यांत्रिक व्यवस्था है जो Wheel–Rail संपर्क से उत्पन्न झटकों एवं कंपन को नियंत्रित करती है, भार का संतुलित वितरण सुनिश्चित करती है तथा कोच की रनिंग स्थिरता (Running Stability) बनाए रखती है।

आधुनिक रेलवे इंजीनियरिंग में Suspension System को केवल आराम (Ride Comfort) के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित परिचालन (Running Safety) के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

अध्याय–10 रेलवे कोच ब्रेक प्रणाली (Railway Coach Brake System) : संरचना, कार्यप्रणाली, निरीक्षण एवं अनुरक्षण

 इस अध्याय में

10.1 ब्रेक प्रणाली का परिचय
10.2 ब्रेक प्रणाली की आवश्यकता एवं सिद्धांत
10.3 एयर ब्रेक प्रणाली का विकास
10.4 एयर ब्रेक प्रणाली के प्रमुख अवयव
10.5 एयर ब्रेक प्रणाली की कार्यप्रणाली
10.6 ब्रेक परीक्षण (Brake Testing)
10.7 निरीक्षण एवं अनुरक्षण
10.8 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

10.1 ब्रेक प्रणाली का परिचय

रेलवे में किसी रेलगाड़ी को चलाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है उसे सुरक्षित, नियंत्रित एवं निर्धारित दूरी में रोकना। यही कार्य ब्रेक प्रणाली (Brake System) करती है।

ब्रेक प्रणाली रेलवे कोच की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणालियों (Safety Systems) में से एक है। इसके माध्यम से चालक आवश्यकतानुसार रेलगाड़ी की गति कम करता है, उसे नियंत्रित रखता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पूर्णतः रोकता है। यदि ब्रेक प्रणाली सही प्रकार से कार्य न करे, तो सुरक्षित रेल परिचालन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

ब्रेक केवल आपातकाल में ट्रेन रोकने का साधन नहीं है। सामान्य परिचालन में प्रत्येक स्टेशन पर रुकना, गति नियंत्रित रखना, ढलान (Gradient) पर सुरक्षित संचालन तथा रेक को स्थिर अवस्था में रखना—इन सभी कार्यों में ब्रेक प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

अध्याय–9 Axle Box एवं Roller Bearing : संरचना, कार्यप्रणाली, निरीक्षण एवं अनुरक्षण

 

इस अध्याय में

9.1 Axle Box का परिचय
9.2 Roller Bearing का परिचय
9.3 Axle Box Assembly के प्रमुख अवयव
9.4 Roller Bearing की कार्यप्रणाली
9.5 Lubrication एवं Sealing System
9.6 Bearing Inspection एवं Maintenance
9.7 Hot Axle Box एवं Bearing Failure
9.8 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

9.1 Axle Box का परिचय

रेलवे कोच की रनिंग प्रणाली में Axle Box एक अत्यंत महत्वपूर्ण यांत्रिक इकाई है। यह Wheel Set तथा Bogie के बीच संपर्क स्थापित करने वाली प्रमुख संरचना है। Wheel Set द्वारा वहन किया गया सम्पूर्ण भार Axle Box के माध्यम से Bogie Frame तक पहुँचता है, जबकि ट्रैक से उत्पन्न गतिशील बल भी इसी मार्ग से आगे स्थानांतरित होते हैं।

Axle Box का मुख्य कार्य केवल Roller Bearing को धारण करना नहीं है, बल्कि Bearing को बाहरी धूल, नमी, पानी तथा अन्य प्रदूषकों से सुरक्षित रखना भी है। इसके अतिरिक्त यह Wheel Set को सही स्थिति में बनाए रखने तथा भार को संतुलित रूप से वितरित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

अध्याय–8 Wheel Set एवं Axle : संरचना, कार्यप्रणाली, निरीक्षण एवं अनुरक्षण

इस अध्याय में

8.1 Wheel Set का परिचय
8.2 Wheel Set की आवश्यकता एवं कार्य
8.3 Wheel Set के प्रमुख अवयव
8.4 Railway Wheel की संरचना
8.5 Axle की संरचना एवं कार्य
8.6 Wheel Set की कार्यप्रणाली
8.7 निरीक्षण एवं अनुरक्षण
8.8 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

8.1 Wheel Set का परिचय

रेलवे कोच अथवा वैगन की सम्पूर्ण रनिंग प्रणाली का आधार Wheel Set है। यही वह यांत्रिक इकाई है जिसके माध्यम से वाहन का सम्पूर्ण भार रेलपथ तक पहुँचता है तथा रेलगाड़ी को सुरक्षित गति प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार का कोच, वैगन अथवा लोकोमोटिव अंततः अपने Wheel Set के माध्यम से ही ट्रैक पर संचालित होता है।

एक Wheel Set में सामान्यतः दो रेलवे पहिए (Railway Wheels) तथा उन्हें जोड़ने वाला एक ठोस एक्सल (Solid Axle) होता है। दोनों पहियों को Axle पर विशेष प्रक्रिया द्वारा स्थायी रूप से स्थापित किया जाता है ताकि परिचालन के दौरान वे एक इकाई (Single Assembly) के रूप में कार्य करें।

अध्याय–7 रेलवे कोच बोगी (Coach Bogie) : संरचना, कार्यप्रणाली एवं अनुरक्षण

 

इस अध्याय में

7.1 बोगी का परिचय

7.2 बोगी की आवश्यकता एवं कार्य

7.3 बोगी के प्रमुख अवयव

7.4 ICF एवं FIAT बोगी

7.5 बोगी की कार्यप्रणाली

7.6 बोगी का निरीक्षण एवं अनुरक्षण

7.7 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

7.1 बोगी का परिचय

रेलवे कोच अथवा वैगन का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग भाग बोगी (Bogie) है। यही वह यांत्रिक इकाई है जिस पर सम्पूर्ण वाहन का भार संतुलित रहता है और जिसके माध्यम से कोच या वैगन रेलपथ पर सुरक्षित रूप से संचालित होता है। यदि किसी कोच की तुलना मानव शरीर से की जाए, तो बोगी उसकी चलने वाली आधार प्रणाली (Running Mechanism) के समान है।

एक आधुनिक यात्री कोच में सामान्यतः दो बोगियाँ होती हैं। प्रत्येक बोगी में दो Wheel Set, Axle Box, Suspension System, Brake Components तथा अन्य आवश्यक यांत्रिक अवयव लगे होते हैं। ये सभी मिलकर वाहन को भार वहन करने, मोड़ों पर दिशा परिवर्तन करने, ट्रैक की अनियमितताओं को सहन करने तथा सुरक्षित एवं स्थिर गति बनाए रखने में सहायता करते हैं।

अध्याय–6 LHB डिज़ाइन यात्री कोच (LHB Design Passenger Coach)

 

इस अध्याय में

6.1 LHB डिज़ाइन का परिचय
6.2 LHB कोच अपनाने की आवश्यकता
6.3 LHB कोच की प्रमुख विशेषताएँ
6.4 LHB कोच की संरचना
6.5 ICF एवं LHB कोच का तुलनात्मक अध्ययन
6.6 LHB कोच का अनुरक्षण
6.7 वर्तमान एवं भविष्य

6.1 LHB डिज़ाइन का परिचय

भारतीय रेल में उच्च गति, बेहतर सुरक्षा तथा अधिक आरामदायक यात्रा की बढ़ती आवश्यकता के परिणामस्वरूप आधुनिक LHB (Linke Hofmann Busch) डिज़ाइन के कोचों को अपनाया गया। यह डिज़ाइन मूल रूप से जर्मनी की Linke Hofmann Busch कंपनी द्वारा विकसित किया गया था, जिसे बाद में भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया और विकसित किया गया।

LHB कोच केवल ICF कोच का उन्नत संस्करण नहीं हैं, बल्कि उनकी संपूर्ण डिज़ाइन अवधारणा (Design Philosophy) अलग है। इनका निर्माण उच्च गति पर स्थिरता, दुर्घटना के समय बेहतर सुरक्षा, कम अनुरक्षण आवश्यकता तथा यात्रियों के लिए अधिक आराम को ध्यान में रखकर किया गया है।

भारतीय रेल में प्रारम्भिक LHB कोचों का निर्माण तकनीकी सहयोग से किया गया, लेकिन वर्तमान में इनका निर्माण भारतीय रेलवे की उत्पादन इकाइयों द्वारा स्वदेशी रूप से किया जा रहा है। आज राजधानी, शताब्दी, वंदे भारत (जहाँ लागू नहीं, क्योंकि वह ट्रेनसेट है), दुरंतो, हमसफर, तेजस तथा अधिकांश नई मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनों में LHB कोचों का उपयोग किया जा रहा है।

LHB कोचों के बढ़ते उपयोग के साथ C&W विभाग की भूमिका भी अधिक तकनीकी हो गई है। FIAT Bogie, Disc Brake, Centre Buffer Coupler (CBC), Modular Toilet, Stainless Steel Body तथा आधुनिक निरीक्षण मानकों के कारण इनके अनुरक्षण के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं अद्यतन तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है।