अध्याय–3 रेलवे रोलिंग स्टॉक : मूल संरचना, प्रमुख अवयव एवं तकनीकी शब्दावली

 

इस अध्याय में

3.1 रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) का परिचय

3.2 रोलिंग स्टॉक का वर्गीकरण

3.3 कोच एवं वैगन की मूल संरचना

3.4 प्रमुख यांत्रिक अवयव

3.5 प्रमुख तकनीकी शब्दावली

3.6 Rolling Stock Identification System

3.7 अध्याय का सार


3.1 रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) का परिचय

रेलवे प्रणाली में प्रयुक्त सभी ऐसे वाहन जो रेलपथ पर चलने के लिए निर्मित होते हैं, सामूहिक रूप से Rolling Stock कहलाते हैं। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो रेलगाड़ी के वे सभी वाहन जो यात्रियों अथवा माल के परिवहन में प्रत्यक्ष रूप से उपयोग किए जाते हैं, Rolling Stock की श्रेणी में आते हैं। इनमें यात्री कोच (Passenger Coaches), माल वैगन (Freight Wagons), रेल मोटर वाहन, निरीक्षण यान तथा अन्य विशेष प्रयोजन के रेल वाहन सम्मिलित होते हैं।

भारतीय रेल में Rolling Stock केवल परिवहन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सम्पूर्ण रेल परिचालन प्रणाली का केंद्रीय घटक है। लोकोमोटिव रेलगाड़ी को गति प्रदान करता है, किन्तु यात्रियों एवं माल का वास्तविक परिवहन कोचों एवं वैगनों के माध्यम से ही होता है। इसलिए Rolling Stock की तकनीकी विश्वसनीयता सीधे-सीधे रेल सुरक्षा, परिचालन क्षमता तथा सेवा गुणवत्ता को प्रभावित करती है।

C&W विभाग का मुख्य कार्यक्षेत्र भी Rolling Stock के अनुरक्षण, निरीक्षण तथा तकनीकी सुरक्षा से संबंधित है। इस कारण किसी भी C&W कर्मचारी के लिए Rolling Stock की मूल संरचना, उसके प्रमुख अवयव तथा उनके कार्यों की स्पष्ट समझ होना अत्यंत आवश्यक है। यही ज्ञान आगे चलकर निरीक्षण, अनुरक्षण तथा दोष विश्लेषण का आधार बनता है।

Rolling Stock को केवल एक वाहन के रूप में नहीं देखा जा सकता। वास्तव में यह अनेक यांत्रिक, संरचनात्मक तथा सुरक्षा प्रणालियों का समन्वित संयोजन है। प्रत्येक कोच अथवा वैगन में अनेक ऐसे अवयव होते हैं जो स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए भी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। उदाहरण के लिए बोगी (Bogie), पहिए (Wheel), एक्सल (Axle), ब्रेक प्रणाली (Brake System), कपलर (Coupler), सस्पेंशन (Suspension), अंडरफ्रेम (Underframe) तथा बॉडी (Body Structure) सभी मिलकर एक सुरक्षित एवं संतुलित वाहन का निर्माण करते हैं।

यदि इन अवयवों में से किसी एक की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो उसका प्रभाव सम्पूर्ण Rolling Stock की सुरक्षा एवं कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए रेलवे अनुरक्षण प्रणाली में प्रत्येक अवयव का निरीक्षण निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों के अनुसार किया जाता है।

आधुनिक भारतीय रेल में Rolling Stock का विकास केवल संरचनात्मक परिवर्तन तक सीमित नहीं है। बेहतर सामग्री (Materials), उन्नत निर्माण तकनीक, आधुनिक ब्रेक प्रणाली, उच्च क्षमता वाली बोगी, डिजिटल मॉनिटरिंग तथा डेटा आधारित अनुरक्षण प्रणाली ने Rolling Stock को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, अधिक विश्वसनीय एवं अधिक दक्ष बनाया है। यही कारण है कि वर्तमान समय में Rolling Stock Engineering रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में से एक मानी जाती है।


3.2 रोलिंग स्टॉक का वर्गीकरण

भारतीय रेल में उपयोग किए जाने वाले Rolling Stock को उसके उपयोग, संरचना तथा परिचालन उद्देश्य के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। यह वर्गीकरण केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं है, बल्कि प्रत्येक श्रेणी की अनुरक्षण प्रणाली, निरीक्षण पद्धति तथा तकनीकी मानक भी उसी के अनुसार निर्धारित किए जाते हैं।

सबसे व्यापक रूप से Rolling Stock को दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया जाता है—

  • Passenger Rolling Stock
  • Freight Rolling Stock

Passenger Rolling Stock में वे सभी कोच सम्मिलित होते हैं जिनका उपयोग यात्रियों के परिवहन के लिए किया जाता है। इनमें सामान्य श्रेणी, शयनयान, वातानुकूलित कोच, चेयर कार, लगेज-कम-ब्रेक वैन, पैंट्री कार, पावर कार तथा अन्य विशेष प्रयोजन के यात्री कोच शामिल हैं। इन कोचों का डिज़ाइन यात्रियों की सुरक्षा, आराम तथा सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है।

Freight Rolling Stock में विभिन्न प्रकार के माल वैगन सम्मिलित होते हैं। इनका निर्माण परिवहन किए जाने वाले माल की प्रकृति के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के लिए कोयला, लौह अयस्क एवं पत्थर जैसे भारी माल के लिए खुले वैगन (Open Wagons), अनाज एवं सीमेंट के लिए बंद वैगन (Covered Wagons), पेट्रोलियम पदार्थों के लिए टैंक वैगन तथा कंटेनर परिवहन के लिए विशेष कंटेनर वैगन उपयोग में लाए जाते हैं।

इन दोनों प्रमुख वर्गों के अतिरिक्त भारतीय रेल में अनेक विशेष प्रयोजन के वाहन भी उपयोग किए जाते हैं। निरीक्षण यान (Inspection Cars), दुर्घटना राहत यान (Accident Relief Vehicles), ब्रेकडाउन क्रेन, ट्रैक मशीनें तथा अन्य इंजीनियरिंग वाहन भी Rolling Stock का महत्वपूर्ण भाग हैं, यद्यपि उनका अनुरक्षण एवं संचालन सामान्य यात्री अथवा माल कोचों से भिन्न होता है।

Rolling Stock का यह वर्गीकरण केवल परिचालन सुविधा के लिए नहीं, बल्कि अनुरक्षण योजना का भी आधार है। प्रत्येक श्रेणी के वाहन के लिए अलग निरीक्षण कार्यक्रम, अलग अनुरक्षण मानक तथा अलग तकनीकी प्रक्रियाएँ निर्धारित होती हैं। इसलिए किसी भी C&W कर्मचारी के लिए यह समझना आवश्यक है कि विभिन्न प्रकार के Rolling Stock की संरचना एवं उपयोग अलग होने के कारण उनकी अनुरक्षण आवश्यकताएँ भी अलग होती हैं।

3.3 कोच एवं वैगन की मूल संरचना

बाहरी दृष्टि से देखने पर रेलवे का कोई भी कोच अथवा वैगन एक साधारण वाहन प्रतीत होता है, किन्तु तकनीकी दृष्टि से यह अनेक संरचनात्मक (Structural), यांत्रिक (Mechanical) तथा सुरक्षा संबंधी (Safety) प्रणालियों का समन्वित संयोजन है। प्रत्येक भाग का अपना विशिष्ट कार्य होता है तथा सभी भाग एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करके सुरक्षित एवं संतुलित परिचालन सुनिश्चित करते हैं।

किसी भी Rolling Stock की संरचना को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि उसका निर्माण केवल यात्रियों अथवा माल को रखने के उद्देश्य से नहीं किया जाता। उसे विभिन्न प्रकार के भार, कंपन, झटकों, मोड़ों, ब्रेकिंग बल, त्वरण (Acceleration) तथा मौसमीय परिस्थितियों को सुरक्षित रूप से सहन करने योग्य भी बनाया जाता है। यही कारण है कि कोच एवं वैगन की संरचना सामान्य वाहनों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत एवं वैज्ञानिक होती है।

यद्यपि विभिन्न प्रकार के कोच एवं वैगनों की संरचना में कुछ अंतर होता है, फिर भी अधिकांश Rolling Stock में निम्नलिखित प्रमुख भाग समान रूप से पाए जाते हैं।


कोच एवं वैगन के प्रमुख संरचनात्मक भाग

क्रमप्रमुख भागमुख्य कार्य
1Bodyयात्रियों अथवा माल के लिए मुख्य संरचना
2Underframeसम्पूर्ण भार को वहन करने वाली आधार संरचना
3Bogieवाहन को चलाने एवं भार वहन करने वाली इकाई
4Wheel & Axleरेलपथ पर सुरक्षित गति प्रदान करना
5Suspension Systemझटकों एवं कंपन को नियंत्रित करना
6Brake Systemगति नियंत्रण एवं सुरक्षित रोकना
7Coupler & Draft Gearवाहनों को जोड़ना एवं झटकों को अवशोषित करना
8Buffing Gear*(जहाँ लागू हो) संपीड़न बल को नियंत्रित करना
9Safety Fittingsसुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना

नोट: आधुनिक LHB कोचों में CBC (Centre Buffer Coupler) प्रणाली होने के कारण पारंपरिक Buffers का उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए विभिन्न प्रकार के Rolling Stock में संरचना में कुछ अंतर हो सकता है।


Body (कोच अथवा वैगन का मुख्य भाग)

Body किसी भी कोच अथवा वैगन का सबसे स्पष्ट दिखाई देने वाला भाग है। यात्री कोचों में यही वह संरचना होती है जिसके भीतर यात्रियों के बैठने, सोने तथा अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है। माल वैगनों में यही संरचना विभिन्न प्रकार के माल को सुरक्षित रखने एवं परिवहन करने का कार्य करती है।

Body का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि वह स्वयं के भार के अतिरिक्त यात्रियों, माल, उपकरणों तथा परिचालन के दौरान उत्पन्न होने वाले गतिशील बलों को सुरक्षित रूप से वहन कर सके। आधुनिक कोचों में प्रयुक्त उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात तथा वेल्डेड संरचना के कारण Body की मजबूती एवं सेवा आयु में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

यात्री कोचों में Body केवल बाहरी ढाँचा नहीं होती, बल्कि उसमें दरवाजे, खिड़कियाँ, छत, फर्श, आंतरिक पैनल, शौचालय, विद्युत उपकरण, वातानुकूलन प्रणाली तथा अनेक अन्य सुविधाएँ भी सम्मिलित रहती हैं।


Underframe (अंडरफ्रेम)

Underframe को किसी भी कोच अथवा वैगन की रीढ़ (Backbone) कहा जा सकता है। सम्पूर्ण वाहन की संरचना इसी पर आधारित होती है। Body, Bogie तथा अन्य भारी उपकरण Underframe पर ही स्थापित किए जाते हैं।

परिचालन के दौरान उत्पन्न होने वाले अधिकांश यांत्रिक बलों को Underframe ही वहन करता है। ब्रेकिंग, त्वरण, मोड़, झटके तथा कपलिंग के दौरान उत्पन्न होने वाले बलों का प्रभाव सबसे अधिक इसी संरचना पर पड़ता है। इसलिए इसका निर्माण अत्यंत मजबूत इस्पात से किया जाता है तथा इसकी नियमित जाँच C&W अनुरक्षण का महत्वपूर्ण भाग होती है।

यदि Underframe में किसी प्रकार की दरार, विकृति (Distortion) अथवा संरचनात्मक क्षति उत्पन्न हो जाए, तो सम्पूर्ण कोच अथवा वैगन की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए निरीक्षण के दौरान Underframe की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।


Bogie (बोगी)

Bogie वह यांत्रिक इकाई है जिस पर कोच अथवा वैगन का सम्पूर्ण भार संतुलित रहता है और जिसके माध्यम से वाहन रेलपथ पर चलता है। सामान्यतः एक यात्री कोच में दो Bogie होती हैं तथा प्रत्येक Bogie में दो Wheel Sets लगे होते हैं।

Bogie केवल पहियों का समूह नहीं है। इसमें Wheel Set, Axle Box, Suspension, Brake Rigging, Bogie Frame तथा अनेक अन्य यांत्रिक अवयव सम्मिलित होते हैं। इन सभी का संयुक्त कार्य वाहन को स्थिरता प्रदान करना, भार वहन करना तथा सुरक्षित गति सुनिश्चित करना होता है।

आधुनिक रेलवे इंजीनियरिंग में Bogie को Rolling Stock का सबसे महत्वपूर्ण यांत्रिक भाग माना जाता है। उच्च गति पर रनिंग गुणवत्ता, यात्रियों का आराम तथा ट्रैक पर वाहन की स्थिरता काफी हद तक Bogie के डिज़ाइन पर निर्भर करती है।

इसी कारण आगे इस पुस्तक में Bogie पर एक स्वतंत्र एवं विस्तृत अध्याय दिया जाएगा।


Wheel & Axle (पहिया एवं एक्सल)

Wheel एवं Axle किसी भी Rolling Stock के सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव हैं। पहिए सीधे रेलपथ के संपर्क में रहते हैं तथा सम्पूर्ण वाहन का भार इन्हीं के माध्यम से रेलपथ तक पहुँचता है।

दो पहियों को एक ठोस Axle द्वारा जोड़ा जाता है, जिसे Wheel Set कहा जाता है। यह व्यवस्था वाहन को स्थिरता प्रदान करती है तथा दोनों पहियों को समान गति से घूमने में सहायता करती है।

Wheel Profile, Wheel Diameter, Axle Strength तथा Wheel Material का वाहन की सुरक्षा पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है। Wheel Flat, Flange Wear, Wheel Crack तथा Axle Defect जैसी तकनीकी समस्याएँ C&W निरीक्षण के अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।

इन्हीं कारणों से Wheel एवं Axle का भी आगे अलग अध्याय में विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

3.3 कोच एवं वैगन की मूल संरचना (क्रमशः)

Suspension System (सस्पेंशन प्रणाली)

रेलवे कोच अथवा वैगन के सुरक्षित एवं आरामदायक परिचालन में सस्पेंशन प्रणाली (Suspension System) की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। रेलपथ पूर्णतः समतल नहीं होता। रेल जोड़ (जहाँ लागू हो), वेल्ड, मोड़ (Curve), ढाल (Gradient), पॉइंट एवं क्रॉसिंग तथा अन्य परिचालन परिस्थितियों के कारण यात्रा के दौरान निरंतर कंपन (Vibration) एवं झटके (Shock) उत्पन्न होते रहते हैं। यदि इन झटकों को सीधे वाहन की बॉडी तक पहुँचने दिया जाए, तो न केवल यात्रियों को असुविधा होगी बल्कि वाहन के विभिन्न यांत्रिक भागों पर भी अत्यधिक तनाव उत्पन्न होगा।

इन्हीं झटकों एवं कंपन को नियंत्रित करने के लिए सस्पेंशन प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य पहियों से उत्पन्न होने वाले झटकों को अवशोषित (Absorb) करना, वाहन को संतुलित रखना तथा उच्च गति पर भी स्थिर एवं सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना है।

आधुनिक रेलवे कोचों में सामान्यतः दो स्तरों की सस्पेंशन व्यवस्था प्रयुक्त होती है—

  • Primary Suspension
  • Secondary Suspension

प्राइमरी सस्पेंशन पहियों एवं बोगी फ्रेम के बीच कार्य करती है, जबकि सेकेंडरी सस्पेंशन बोगी एवं कोच बॉडी के बीच स्थित होती है। दोनों मिलकर वाहन की रनिंग गुणवत्ता (Ride Quality) तथा यात्रियों के आराम को बेहतर बनाती हैं।

सस्पेंशन प्रणाली का नियमित निरीक्षण अत्यंत आवश्यक होता है। स्प्रिंग का टूटना, असमान बैठना (Unequal Height), रबर अवयवों का क्षतिग्रस्त होना अथवा अन्य यांत्रिक दोष वाहन की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए C&W निरीक्षण के दौरान सस्पेंशन प्रणाली की स्थिति का विशेष परीक्षण किया जाता है।


Brake System (ब्रेक प्रणाली)

किसी भी रेलगाड़ी की गति को नियंत्रित करना तथा आवश्यकता पड़ने पर उसे सुरक्षित रूप से रोकना ब्रेक प्रणाली का मुख्य कार्य है। यदि Rolling Stock में प्रभावी एवं विश्वसनीय ब्रेक व्यवस्था उपलब्ध न हो, तो तेज गति से चलने वाली रेलगाड़ी का सुरक्षित परिचालन संभव नहीं है।

भारतीय रेल में प्रारम्भिक काल में वैक्यूम ब्रेक प्रणाली का व्यापक उपयोग होता था, किन्तु वर्तमान समय में अधिकांश यात्री कोचों एवं माल वैगनों में Air Brake System का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली अधिक प्रभावी, अधिक विश्वसनीय तथा उच्च गति के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है।

ब्रेक प्रणाली केवल ब्रेक ब्लॉक अथवा ब्रेक पैड तक सीमित नहीं होती। इसमें ब्रेक पाइप, एयर रिज़र्वायर, कंट्रोल वाल्व, ब्रेक सिलेंडर, ब्रेक रिगिंग तथा अनेक अन्य यांत्रिक एवं वायवीय (Pneumatic) अवयव सम्मिलित होते हैं। इन सभी के समन्वित कार्य से वाहन की गति नियंत्रित होती है।

ब्रेक प्रणाली का निरीक्षण C&W विभाग के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक है। किसी भी प्रकार का वायु रिसाव (Air Leakage), ब्रेक ब्लॉक का अत्यधिक घिसाव, ब्रेक रिगिंग में दोष अथवा अन्य खराबी सीधे रेल सुरक्षा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रत्येक निर्धारित निरीक्षण में ब्रेक प्रणाली का परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाता है।

इस पुस्तक में Air Brake System पर एक स्वतंत्र विस्तृत अध्याय दिया जाएगा, जिसमें इसकी संरचना, कार्यप्रणाली, परीक्षण तथा सामान्य दोषों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा।


Coupler एवं Draft Gear

रेलगाड़ी के विभिन्न कोचों एवं वैगनों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य Coupler द्वारा किया जाता है। यह केवल यांत्रिक जोड़ (Mechanical Connection) नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण ट्रेन में खिंचाव (Tensile Force) तथा संपीड़न (Compressive Force) का सुरक्षित संचरण भी सुनिश्चित करता है।

भारतीय रेल में समय के साथ कपलिंग प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पारंपरिक Screw Coupling व्यवस्था के स्थान पर अधिकांश आधुनिक कोचों एवं अनेक प्रकार के माल वैगनों में Centre Buffer Coupler (CBC) का उपयोग किया जा रहा है। CBC प्रणाली अधिक मजबूत, अधिक सुरक्षित तथा उच्च गति के परिचालन के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

Coupler के साथ Draft Gear भी लगाया जाता है, जिसका कार्य ट्रेन के प्रारम्भ होने, रुकने अथवा गति परिवर्तन के समय उत्पन्न झटकों को नियंत्रित करना होता है। यदि Draft Gear प्रभावी रूप से कार्य न करे, तो झटके सीधे वाहन की संरचना पर प्रभाव डाल सकते हैं।

Coupler एवं Draft Gear दोनों का नियमित निरीक्षण आवश्यक होता है। घिसाव (Wear), ढीलापन (Excessive Play), दरार (Crack) अथवा लॉकिंग में दोष जैसे कारण गंभीर परिचालन समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए C&W अनुरक्षण में इन अवयवों की जाँच विशेष महत्व रखती है।


Safety Fittings (सुरक्षा उपकरण)

Rolling Stock में अनेक ऐसे उपकरण लगाए जाते हैं जिनका उद्देश्य सीधे यात्रियों की सुरक्षा अथवा परिचालन सुरक्षा को सुनिश्चित करना होता है। इन्हें सामूहिक रूप से Safety Fittings कहा जाता है। विभिन्न प्रकार के कोचों एवं वैगनों में इनकी संख्या एवं प्रकार अलग-अलग हो सकते हैं।

इनमें सुरक्षा चेन, हैंड ब्रेक, सेफ्टी ब्रैकेट, फुट स्टेप, ग्रैब हैंडल, आपातकालीन उपकरण, अग्निशमन यंत्र (जहाँ लागू हो), ब्रेक रिलीज़ व्यवस्था तथा अन्य अनेक सुरक्षा संबंधी उपकरण सम्मिलित हो सकते हैं।

इन उपकरणों का निरीक्षण केवल उनकी उपलब्धता तक सीमित नहीं होता। यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि आवश्यकता पड़ने पर वे सही प्रकार से कार्य करें। C&W निरीक्षण के दौरान Safety Fittings की कार्यशीलता का परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में इनका उपयोग कम होता है, किन्तु आपातकालीन स्थिति में यही उपकरण यात्रियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।


3.4 प्रमुख यांत्रिक अवयव (Major Mechanical Components)

अब तक हमने किसी कोच अथवा वैगन की मूल संरचना को समझा। अब उन प्रमुख यांत्रिक अवयवों का संक्षिप्त परिचय आवश्यक है जिनका विस्तृत अध्ययन आगे के अध्यायों में किया जाएगा।

रेलवे Rolling Stock के प्रमुख यांत्रिक अवयव निम्नलिखित हैं—

अवयवमुख्य कार्यविस्तृत अध्ययन
Wheelरेलपथ पर वाहन को चलानाअध्याय – 8
Axleदोनों पहियों को जोड़ना एवं भार वहन करनाअध्याय – 8
Roller BearingAxle को कम घर्षण के साथ घूमने देनाअध्याय – 9
Bogie Frameसम्पूर्ण बोगी की आधार संरचनाअध्याय – 7
Springझटकों को नियंत्रित करनाअध्याय – 7
Brake Cylinderब्रेक लगाने हेतु बल उत्पन्न करनाअध्याय – 10
Brake Riggingब्रेक बल को पहियों तक पहुँचानाअध्याय – 10
CBCकोचों एवं वैगनों को जोड़नाअध्याय – 11
Draft Gearझटकों को अवशोषित करनाअध्याय – 11

इन सभी अवयवों का अनुरक्षण, निरीक्षण तथा दोष पहचान C&W विभाग के दैनिक कार्यों का महत्वपूर्ण भाग है। इसलिए आगे के अध्यायों में प्रत्येक अवयव का निर्माण, कार्यप्रणाली, निरीक्षण विधि, सामान्य दोष, अनुरक्षण मानक तथा विभागीय परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

3.5 प्रमुख तकनीकी शब्दावली (Technical Terminology)

रेलवे की तकनीकी भाषा सामान्य बोलचाल की भाषा से भिन्न होती है। अनुरक्षण, निरीक्षण, दुर्घटना जाँच, तकनीकी रिपोर्ट, कार्यशाला अभिलेख, RDSO निर्देश, CAMTECH प्रकाशन तथा रेलवे बोर्ड के परिपत्रों में अनेक ऐसे शब्द प्रयुक्त होते हैं जिनका विशिष्ट तकनीकी अर्थ होता है। यदि इन शब्दों की सही समझ न हो, तो तकनीकी निर्देशों का सही अनुपालन करना कठिन हो सकता है।

C&W विभाग में कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी, पर्यवेक्षक तथा अधिकारी के लिए यह आवश्यक है कि वह इन तकनीकी शब्दों के मानक अर्थ को समझे तथा उनका सही संदर्भ में उपयोग करे। आगे के अध्यायों में भी इन शब्दों का बार-बार प्रयोग होगा, इसलिए पहले इनका मूल परिचय आवश्यक है।


Rolling Stock

रेलपथ पर चलने वाले सभी प्रकार के रेलवे वाहनों को सामूहिक रूप से Rolling Stock कहा जाता है। इसमें यात्री कोच, माल वैगन, निरीक्षण यान, विशेष प्रयोजन के वाहन तथा अन्य रेल वाहन सम्मिलित होते हैं। सामान्यतः लोकोमोटिव को अलग श्रेणी में रखा जाता है, जबकि C&W विभाग का मुख्य कार्यक्षेत्र कोच एवं वैगन होते हैं।


Coach

यात्रियों के परिवहन के लिए निर्मित रेलवे वाहन को Coach कहा जाता है। विभिन्न उद्देश्यों के अनुसार Sleeper Coach, General Coach, AC Coach, Chair Car, Pantry Car, Power Car तथा Luggage-cum-Brake Van जैसे अनेक प्रकार के कोच उपयोग में लाए जाते हैं।


Wagon

माल परिवहन के लिए निर्मित रेलवे वाहन को Wagon कहा जाता है। विभिन्न प्रकार के माल के अनुसार इनके अनेक डिज़ाइन विकसित किए गए हैं, जैसे Open Wagon, Covered Wagon, Tank Wagon, Hopper Wagon, Flat Wagon तथा Container Wagon।


Rake

परिचालन के लिए एक साथ जोड़े गए कोचों अथवा वैगनों के समूह को Rake कहा जाता है। यात्री रेक (Passenger Rake) एवं माल रेक (Freight Rake) दोनों का अनुरक्षण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जाता है।


Bogie

कोच अथवा वैगन के नीचे स्थित वह यांत्रिक इकाई जिस पर Wheel Set, Suspension, Brake Rigging तथा अन्य रनिंग अवयव स्थापित होते हैं, Bogie कहलाती है। यह वाहन का भार वहन करने, दिशा परिवर्तन में सहायता करने तथा सुरक्षित एवं स्थिर गति सुनिश्चित करने का कार्य करती है।


Wheel Set

एक Axle पर स्थायी रूप से लगे दो पहियों के समूह को Wheel Set कहा जाता है। यह Rolling Stock का मूल रनिंग अवयव है तथा सम्पूर्ण वाहन का भार इसी के माध्यम से रेलपथ पर स्थानांतरित होता है।


Axle Load

किसी एक Axle द्वारा वहन किए जाने वाले कुल भार को Axle Load कहा जाता है। रेलवे ट्रैक की डिज़ाइन, पुलों की क्षमता तथा वैगनों की भार वहन सीमा निर्धारित करने में Axle Load का विशेष महत्व होता है।


Tare Weight

किसी खाली कोच अथवा वैगन का स्वयं का भार Tare Weight कहलाता है। इसमें यात्रियों अथवा माल का भार सम्मिलित नहीं होता।


Payload

वैगन में लादे गए वास्तविक माल के भार को Payload कहा जाता है। अर्थात् वह भार जिसके परिवहन के लिए वैगन का उपयोग किया जा रहा है।


Gross Weight

Tare Weight तथा Payload के योग को Gross Weight कहा जाता है। यही कुल भार परिचालन के दौरान ट्रैक एवं पुलों पर प्रभाव डालता है।


Brake Power

किसी रेलगाड़ी अथवा वाहन की प्रभावी ब्रेक लगाने की क्षमता को Brake Power कहा जाता है। सुरक्षित परिचालन के लिए निर्धारित Brake Power का उपलब्ध होना अनिवार्य होता है।


CBC (Centre Buffer Coupler)

आधुनिक कोचों एवं अनेक माल वैगनों में प्रयुक्त स्वचालित कपलिंग प्रणाली को Centre Buffer Coupler (CBC) कहा जाता है। यह पारंपरिक Screw Coupling की तुलना में अधिक मजबूत, अधिक सुरक्षित तथा उच्च गति के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है।


ROH (Routine Overhaul)

निर्धारित समय अथवा किलोमीटर पूरा होने पर किया जाने वाला विस्तृत नियोजित अनुरक्षण Routine Overhaul (ROH) कहलाता है। इसका उद्देश्य वाहन की तकनीकी विश्वसनीयता बनाए रखना तथा संभावित दोषों को समय रहते दूर करना है।


POH (Periodic Overhaul)

Rolling Stock का निर्धारित अवधि पर किया जाने वाला व्यापक निरीक्षण, मरम्मत एवं पुनर्स्थापन Periodic Overhaul (POH) कहलाता है। यह सामान्य अनुरक्षण की तुलना में अधिक विस्तृत प्रक्रिया होती है और सामान्यतः कार्यशालाओं में सम्पन्न की जाती है।

नोट: POH एवं ROH की विस्तृत प्रक्रिया का अध्ययन आगे संबंधित अध्याय में किया जाएगा।


तकनीकी शब्दों का सही उपयोग

C&W विभाग में किसी भी तकनीकी रिपोर्ट, निरीक्षण विवरण अथवा अनुरक्षण अभिलेख में शब्दों का प्रयोग निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के लिए—

  • Coach और Wagon एक-दूसरे के स्थान पर प्रयुक्त नहीं किए जा सकते।
  • Wheel और Wheel Set में स्पष्ट अंतर है।
  • Bogie और Underframe अलग-अलग संरचनाएँ हैं।
  • Tare Weight, Payload तथा Gross Weight तीनों के अर्थ भिन्न हैं।
  • ROH और POH अलग-अलग अनुरक्षण स्तर हैं।

इसी प्रकार विभागीय परीक्षाओं में भी इन शब्दों के अर्थ, अंतर तथा उपयोग से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं। इसलिए इनकी स्पष्ट समझ प्रत्येक कर्मचारी के लिए आवश्यक है।


3.6 Rolling Stock Identification System

भारतीय रेल में प्रत्येक कोच एवं वैगन की एक विशिष्ट पहचान (Identification) होती है। यह पहचान केवल उसके क्रमांक तक सीमित नहीं होती, बल्कि उससे उसके प्रकार, उपयोग, स्वामित्व, निर्माण श्रेणी तथा कई अन्य तकनीकी जानकारियाँ भी प्राप्त होती हैं।

प्रत्येक कोच अथवा वैगन पर अंकित संख्या एवं कोड रेलवे के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इनके माध्यम से उस वाहन का अनुरक्षण इतिहास, निरीक्षण रिकॉर्ड, मरम्मत विवरण, निर्माण इकाई तथा परिचालन संबंधी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

आधुनिक भारतीय रेल में अधिकांश अनुरक्षण रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में भी उपलब्ध होते हैं, जिससे किसी विशेष Rolling Stock का सम्पूर्ण अनुरक्षण इतिहास आवश्यकतानुसार देखा जा सकता है।

कोच एवं वैगन नंबरिंग प्रणाली, वैगन कोड, कोच कोड तथा UIC आधारित पहचान प्रणाली का विस्तृत अध्ययन इस पुस्तक के आगामी अध्यायों में किया जाएगा, क्योंकि यह स्वयं एक स्वतंत्र तकनीकी विषय है।


3.7 अध्याय का सार

रेलवे Rolling Stock भारतीय रेल की परिचालन प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण घटक है। यात्रियों एवं माल का सुरक्षित परिवहन कोचों एवं वैगनों के माध्यम से ही संभव होता है, इसलिए उनकी संरचना, अनुरक्षण तथा तकनीकी विश्वसनीयता का रेलवे सुरक्षा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

इस अध्याय में हमने जाना कि Rolling Stock शब्द का क्या अर्थ है तथा इसमें कौन-कौन से वाहन सम्मिलित होते हैं। साथ ही Passenger Rolling Stock एवं Freight Rolling Stock के बीच मूलभूत अंतर तथा उनके उपयोग को समझा। इसके पश्चात किसी भी कोच अथवा वैगन की आधारभूत संरचना का अध्ययन किया गया, जिसमें Body, Underframe, Bogie, Wheel Set, Suspension System, Brake System, Coupler एवं Draft Gear जैसे प्रमुख अवयवों की भूमिका को समझाया गया।

इसके अतिरिक्त C&W विभाग में प्रचलित महत्वपूर्ण तकनीकी शब्दों—जैसे Coach, Wagon, Rake, Wheel Set, Tare Weight, Payload, Gross Weight, Brake Power, CBC, ROH एवं POH—का संक्षिप्त परिचय दिया गया। इन शब्दों का सही ज्ञान तकनीकी संचार, अनुरक्षण अभिलेखों तथा विभागीय परीक्षाओं की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

Rolling Stock का प्रत्येक भाग एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। किसी एक अवयव में उत्पन्न दोष सम्पूर्ण वाहन की कार्यक्षमता एवं सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि C&W विभाग प्रत्येक यांत्रिक अवयव का निरीक्षण निर्धारित मानकों एवं समय-सारिणी के अनुसार करता है। नियमित अनुरक्षण, समय पर निरीक्षण तथा तकनीकी मानकों का पालन ही सुरक्षित रेल परिचालन का आधार है।

इस अध्याय का उद्देश्य पाठक को आगे आने वाले तकनीकी अध्यायों के लिए आवश्यक आधारभूत ज्ञान प्रदान करना था। अगले अध्यायों में इन्हीं प्रमुख अवयवों का क्रमशः विस्तृत एवं तकनीकी अध्ययन किया जाएगा।


अध्याय–3 से प्राप्त प्रमुख बिंदु

याद रखने योग्य तथ्य

  • Rolling Stock में मुख्य रूप से Coach एवं Wagon सम्मिलित होते हैं।
  • Passenger Rolling Stock एवं Freight Rolling Stock की संरचना एवं उपयोग अलग-अलग होते हैं।
  • Underframe किसी भी कोच अथवा वैगन की आधारभूत भार वहन करने वाली संरचना है।
  • Bogie वाहन का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग मैकेनिज्म है।
  • Wheel Set सीधे रेलपथ के संपर्क में रहने वाला प्रमुख अवयव है।
  • Suspension System झटकों एवं कंपन को नियंत्रित करता है।
  • Brake System सुरक्षित परिचालन की सबसे महत्वपूर्ण प्रणालियों में से एक है।
  • CBC आधुनिक कपलिंग प्रणाली है, जिसका उपयोग अधिकांश नए कोचों एवं अनेक वैगनों में किया जाता है।
  • ROH एवं POH दोनों नियोजित अनुरक्षण (Planned Maintenance) के महत्वपूर्ण स्तर हैं, किन्तु उनका उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र अलग-अलग है।

अभ्यास हेतु विचारणीय प्रश्न

(यह अनुभाग विभागीय परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी रहेगा। आगे प्रत्येक अध्याय के अंत में इसी प्रकार प्रश्न दिए जा सकते हैं।)

लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. Rolling Stock से क्या अभिप्राय है?
  2. Coach एवं Wagon में क्या अंतर है?
  3. Underframe का मुख्य कार्य क्या है?
  4. Bogie क्यों महत्वपूर्ण है?
  5. Wheel Set किसे कहते हैं?
  6. Tare Weight एवं Payload में क्या अंतर है?
  7. CBC का पूरा नाम लिखिए।
  8. ROH एवं POH में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  9. Brake Power से क्या अभिप्राय है?
  10. Rolling Stock की तकनीकी पहचान क्यों आवश्यक है?

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)

1. निम्न में से कौन Rolling Stock का भाग नहीं है?

(A) Coach
(B) Wagon
(C) Bogie
(D) Station Building

उत्तर: (D)


2. किसी खाली वैगन के स्वयं के भार को क्या कहते हैं?

(A) Payload
(B) Gross Weight
(C) Tare Weight
(D) Axle Load

उत्तर: (C)


3. आधुनिक कोचों में मुख्य रूप से कौन-सी कपलिंग प्रणाली प्रयुक्त होती है?

(A) Screw Coupling
(B) Chain Coupling
(C) Centre Buffer Coupler
(D) Link Coupling

उत्तर: (C)


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