इस अध्याय में
8.1 Wheel Set का परिचय
रेलवे कोच अथवा वैगन की सम्पूर्ण रनिंग प्रणाली का आधार Wheel Set है। यही वह यांत्रिक इकाई है जिसके माध्यम से वाहन का सम्पूर्ण भार रेलपथ तक पहुँचता है तथा रेलगाड़ी को सुरक्षित गति प्राप्त होती है। किसी भी प्रकार का कोच, वैगन अथवा लोकोमोटिव अंततः अपने Wheel Set के माध्यम से ही ट्रैक पर संचालित होता है।
Wheel Set केवल वाहन को चलाने का माध्यम नहीं है। यह वाहन का भार वहन करता है, ट्रैक पर दिशा बनाए रखता है, ब्रेकिंग बल को ग्रहण करता है तथा मोड़ों पर सुरक्षित परिचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि रेलवे इंजीनियरिंग में Wheel Set को Safety Critical Component माना जाता है।
भारतीय रेल में Wheel Set का निर्माण, निरीक्षण, अनुरक्षण तथा प्रतिस्थापन निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है। Wheel Profile, Wheel Diameter, Flange Thickness, Axle की स्थिति तथा अन्य तकनीकी मानकों का नियमित परीक्षण C&W विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
8.2 Wheel Set की आवश्यकता एवं कार्य
यदि किसी कोच में केवल पहिए लगा दिए जाएँ और उन्हें उपयुक्त Axle, Bearing तथा Suspension व्यवस्था से न जोड़ा जाए, तो सुरक्षित परिचालन संभव नहीं होगा। इसी कारण Wheel Set को एक समन्वित यांत्रिक इकाई के रूप में विकसित किया गया है।
Wheel Set के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
- सम्पूर्ण कोच अथवा वैगन का भार वहन करना।
- रेलपथ पर सुरक्षित एवं संतुलित गति प्रदान करना।
- ट्रैक की दिशा का अनुसरण करना।
- ब्रेकिंग बल को ग्रहण करना।
- ट्रैक्शन बल को Wheel तक पहुँचाना।
- मोड़ों पर सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करना।
- Wheel एवं Rail के बीच आवश्यक संपर्क बनाए रखना।
इन सभी कार्यों के कारण Wheel Set को रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव माना जाता है।
8.3 Wheel Set के प्रमुख अवयव
Wheel Set देखने में एक साधारण इकाई प्रतीत होती है, किन्तु वास्तव में यह अनेक महत्वपूर्ण अवयवों का संयोजन है। प्रत्येक अवयव का अपना विशिष्ट कार्य होता है तथा सभी मिलकर सुरक्षित परिचालन सुनिश्चित करते हैं।
मुख्य अवयव निम्नलिखित हैं—
| अवयव | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Wheel | रेल से संपर्क एवं भार वहन |
| Axle | दोनों Wheels को जोड़ना एवं भार वहन करना |
| Wheel Hub | Wheel को Axle पर स्थापित करना |
| Wheel Tread | Rail के ऊपर चलने वाला भाग |
| Flange | Wheel को Rail पर बनाए रखना |
| Rim | बाहरी रनिंग भाग |
| Roller Bearing | Axle को कम घर्षण के साथ घूमने देना |
| Axle Box | Bearing एवं Axle को सहारा देना |
Wheel Set का निरीक्षण करते समय इन सभी अवयवों की स्थिति का परीक्षण किया जाता है।
8.4 Railway Wheel की संरचना
रेलवे का पहिया (Railway Wheel) सामान्य वाहन के पहिए से भिन्न होता है। इसका डिज़ाइन इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह भारी भार, उच्च गति तथा निरंतर परिचालन के दौरान भी सुरक्षित रूप से कार्य कर सके।
एक रेलवे पहिए के मुख्य भाग निम्नलिखित हैं—
| भाग | कार्य |
|---|---|
| Tread | Rail पर चलने वाला सतह भाग |
| Flange | Wheel को Rail से उतरने से रोकना |
| Rim | बाहरी मजबूत भाग |
| Web | Rim एवं Hub को जोड़ना |
| Hub | Wheel को Axle पर Press Fit करना |
Wheel Tread
Wheel Tread वह सतह है जो सीधे रेल के संपर्क में रहती है। सम्पूर्ण वाहन का भार इसी सतह के माध्यम से Rail तक पहुँचता है।
समय के साथ Tread पर घिसाव होना स्वाभाविक है, इसलिए इसका नियमित निरीक्षण किया जाता है। यदि Tread पर Flat, Shelling, Corrugation अथवा अन्य दोष उत्पन्न हो जाएँ, तो Wheel की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
Flange
Flange Wheel का भीतरी उठा हुआ भाग है। इसका मुख्य कार्य Wheel को Rail से उतरने से रोकना तथा मोड़ों पर Wheel का मार्गदर्शन करना है।
यदि Flange अत्यधिक घिस जाए अथवा निर्धारित सीमा से कम हो जाए, तो परिचालन सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी प्रकार अत्यधिक मोटा Flange भी Wheel–Rail संपर्क को प्रभावित कर सकता है।
इस कारण Flange की मोटाई एवं Profile की नियमित जाँच निर्धारित Gauges द्वारा की जाती है।
Rim
Rim Wheel का बाहरी भाग है जिसमें Tread एवं Flange दोनों सम्मिलित होते हैं। यह Wheel का सबसे अधिक कार्य करने वाला भाग है क्योंकि यही सीधे Rail के संपर्क में रहता है।
Rim पर Crack, Shelling, Metal Flow अथवा अन्य दोषों की नियमित जाँच की जाती है।
Web
Web Wheel का मध्य भाग है जो Rim एवं Hub को जोड़ता है। इसका कार्य केवल संरचनात्मक जोड़ प्रदान करना नहीं है, बल्कि परिचालन के दौरान उत्पन्न विभिन्न यांत्रिक बलों को सुरक्षित रूप से वितरित करना भी है।
यदि Web में किसी प्रकार की दरार उत्पन्न हो जाए, तो Wheel को सेवा में रखना सुरक्षित नहीं माना जाता।
Hub
Hub Wheel का केंद्रीय भाग है जिसमें Axle को Press Fit किया जाता है। यह Wheel एवं Axle के बीच मजबूत यांत्रिक संबंध स्थापित करता है।
Hub का निर्माण अत्यंत उच्च परिशुद्धता (High Precision) के साथ किया जाता है ताकि Press Fit दीर्घकाल तक सुरक्षित बना रहे।
8.5 Axle की संरचना एवं कार्य
Axle, Wheel Set का वह प्रमुख अवयव है जिस पर दोनों पहिए स्थायी रूप से स्थापित किए जाते हैं। यह सम्पूर्ण Wheel Set की रीढ़ (Backbone) के समान कार्य करता है। परिचालन के दौरान Wheel द्वारा वहन किया गया सम्पूर्ण भार Axle के माध्यम से ही Roller Bearing, Axle Box तथा आगे Bogie तक पहुँचता है।
रेलवे Axle का निर्माण उच्च गुणवत्ता वाले विशेष इस्पात (Forged Steel) से किया जाता है। निर्माण के दौरान इसकी यांत्रिक शक्ति, थकान प्रतिरोध (Fatigue Strength), संतुलन तथा आयामी शुद्धता (Dimensional Accuracy) का विशेष ध्यान रखा जाता है, क्योंकि यह एक Safety Critical Component है।
यद्यपि Axle सामान्यतः स्थिर (Non-Rotating with respect to wheels as assembly rotates together) संरचना के रूप में दिखाई देता है, वास्तव में पूरा Wheel Set—जिसमें Axle और दोनों Wheels शामिल हैं—एक साथ घूमता है। Bearing के माध्यम से यह Assembly Bogie के सापेक्ष कम घर्षण के साथ घूमती रहती है।
Axle के प्रमुख भाग
एक सामान्य रेलवे Axle में निम्नलिखित प्रमुख भाग होते हैं—
| भाग | मुख्य कार्य |
|---|---|
| Wheel Seat | Wheel को Press Fit करने का स्थान |
| Bearing Seat | Roller Bearing स्थापित करने का स्थान |
| Journal Portion | Bearing के संपर्क वाला भाग |
| Axle Body | मुख्य भार वहन करने वाला भाग |
| Center Portion | अधिकतम झुकाव (Bending) सहन करने वाला भाग |
| End Portion | End Cap एवं अन्य फिटिंग हेतु |
इन सभी भागों का निर्माण निर्धारित मानकों एवं सूक्ष्म सहनशीलता (Tolerance) के अनुसार किया जाता है।
Axle के मुख्य कार्य
Axle केवल दोनों Wheels को जोड़ने का कार्य नहीं करता। यह कई महत्वपूर्ण यांत्रिक कार्य एक साथ करता है।
इसके प्रमुख कार्य हैं—
- दोनों Wheels को स्थायी रूप से जोड़कर Wheel Set बनाना।
- सम्पूर्ण वाहन का भार वहन करना।
- ब्रेकिंग एवं ट्रैक्शन बलों को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित करना।
- मोड़ों पर उत्पन्न पार्श्व बलों (Lateral Forces) को सहन करना।
- Wheel की सही दूरी (Back-to-Back Distance) बनाए रखना।
- Wheel Set की ज्यामितीय स्थिरता सुनिश्चित करना।
इन सभी कार्यों के कारण Axle की गुणवत्ता सीधे परिचालन सुरक्षा से जुड़ी होती है।
Wheel एवं Axle का Press Fit
रेलवे Wheel केवल Axle पर चढ़ाया नहीं जाता, बल्कि विशेष Hydraulic Wheel Press Machine द्वारा निर्धारित Interference Fit के साथ Press Fit किया जाता है।
इस प्रक्रिया में Wheel Hub का आंतरिक व्यास Axle के Wheel Seat से अत्यंत सूक्ष्म अंतर के साथ तैयार किया जाता है। उच्च दाब (High Pressure) की सहायता से Wheel को Axle पर स्थायी रूप से स्थापित किया जाता है।
इस प्रकार का Press Fit निम्न कारणों से आवश्यक है—
- Wheel का Axle पर घूमना (Slippage) रोकना।
- उच्च ट्रैक्शन बलों को सुरक्षित रूप से सहन करना।
- Wheel Gauge बनाए रखना।
- लंबे समय तक यांत्रिक मजबूती सुनिश्चित करना।
यदि Press Fit निर्धारित मानकों के अनुरूप न हो, तो Wheel Movement, Axle Damage अथवा अन्य गंभीर यांत्रिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
8.6 Wheel Set की कार्यप्रणाली
Wheel Set रेलवे कोच की सम्पूर्ण रनिंग प्रणाली का आधार है। यही Wheel Rail के संपर्क में रहता है तथा ट्रैक से प्राप्त सभी बलों को नियंत्रित करता है।
जब रेलगाड़ी चलती है, तब Wheel Tread सीधे Rail के ऊपर रोल करता है। इस Rolling Contact के कारण Sliding Friction के स्थान पर Rolling Friction उत्पन्न होती है, जिससे ऊर्जा की हानि कम होती है तथा वाहन अधिक दक्षता के साथ संचालित होता है।
Wheel Flange सामान्य परिस्थितियों में Rail से लगातार संपर्क में नहीं रहती। इसका कार्य केवल आवश्यकता पड़ने पर, विशेष रूप से मोड़ों (Curves), Point एवं Crossing के समय, Wheel का मार्गदर्शन करना है।
Wheel–Rail संपर्क
रेलवे इंजीनियरिंग में Wheel एवं Rail का संपर्क अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सम्पूर्ण वाहन का भार वास्तव में Wheel एवं Rail के बीच बहुत छोटे संपर्क क्षेत्र (Contact Patch) के माध्यम से स्थानांतरित होता है।
यद्यपि यह संपर्क क्षेत्र आकार में अत्यंत छोटा होता है, फिर भी इसी के माध्यम से—
- वाहन का भार,
- ट्रैक्शन,
- ब्रेकिंग,
- दिशा नियंत्रण,
सभी कार्य सम्पन्न होते हैं।
इसी कारण Wheel Profile तथा Rail Profile का सही होना अत्यंत आवश्यक है।
मोड़ों पर Wheel Set की कार्यप्रणाली
जब रेलगाड़ी किसी Curve से गुजरती है, तब बाहरी Wheel को आंतरिक Wheel की तुलना में अधिक दूरी तय करनी होती है।
रेलवे Wheel का Tread हल्का शंक्वाकार (Conical Profile) बनाया जाता है। इस कारण बिना किसी Differential Gear के भी दोनों Wheels आवश्यक दूरी का अंतर स्वतः समायोजित कर लेते हैं।
यह रेलवे Wheel Design की अत्यंत महत्वपूर्ण विशेषता है तथा यही कारण है कि रेलवे Wheel Set में सड़क वाहनों की तरह Differential Gear की आवश्यकता नहीं होती।
Wheel Profile का महत्व
Wheel Profile केवल Wheel का आकार नहीं है, बल्कि सुरक्षित परिचालन का आधार है।
यदि Wheel Profile निर्धारित मानकों के अनुरूप हो तो—
- Wheel–Rail संपर्क संतुलित रहता है।
- Wheel Wear कम होता है।
- Ride Quality बेहतर रहती है।
- Derailment का जोखिम कम होता है।
- Track Maintenance की आवश्यकता कम होती है।
इसी कारण Wheel Profile का निरीक्षण निर्धारित Gauges द्वारा नियमित रूप से किया जाता है।
Back-to-Back Distance
दोनों Wheels के भीतरी Flange के बीच की दूरी को Back-to-Back Distance कहा जाता है।
यह माप अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि—
- यही Wheel Set को Rail Gauge के अनुरूप बनाए रखती है।
- Curves एवं Turnout पर सुरक्षित रनिंग सुनिश्चित करती है।
- Flange Contact को नियंत्रित करती है।
यदि यह दूरी निर्धारित सीमा से बाहर हो जाए, तो परिचालन सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए Wheel Shop एवं Maintenance Depot दोनों स्थानों पर इसका परीक्षण निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाता है।
Wheel Set का संतुलन (Balance)
Wheel Set का संतुलन (Balancing) विशेष रूप से उच्च गति वाले कोचों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यदि Wheel Set संतुलित न हो, तो—
- कंपन बढ़ सकता है।
- Bearing पर अतिरिक्त भार आ सकता है।
- Wheel Wear बढ़ सकता है।
- Ride Quality प्रभावित हो सकती है।
- Track पर अतिरिक्त Dynamic Force उत्पन्न हो सकता है।
इसी कारण Wheel Set के निर्माण एवं मरम्मत के बाद आवश्यक परीक्षण किए जाते हैं ताकि वह निर्धारित मानकों के अनुरूप संतुलित रहे।
8.7 Wheel Set का निरीक्षण एवं अनुरक्षण
Wheel Set रेलवे कोच का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव है। इसका निरीक्षण केवल Wheel की बाहरी स्थिति देखने तक सीमित नहीं होता, बल्कि पूरे Wheel Set Assembly की तकनीकी स्थिति का मूल्यांकन किया जाता है। निरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Wheel, Axle, Bearing तथा संबंधित सभी अवयव सुरक्षित रूप से कार्य कर रहे हैं तथा कोच को सेवा में बनाए रखने योग्य हैं।
भारतीय रेल में Wheel Set का निरीक्षण निर्धारित अनुरक्षण अनुसूचियों (Maintenance Schedules) के अनुसार किया जाता है। प्रत्येक स्तर—जैसे Train Examination, Primary Maintenance, Secondary Maintenance, ROH एवं POH—पर निरीक्षण की गहराई अलग हो सकती है, किन्तु सुरक्षा से संबंधित बिंदुओं की जाँच प्रत्येक स्तर पर प्राथमिकता से की जाती है।
निरीक्षण के प्रमुख उद्देश्य
Wheel Set निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य संभावित दोषों का प्रारम्भिक चरण में पता लगाना तथा उन्हें गंभीर समस्या बनने से पहले दूर करना है।
निरीक्षण के दौरान विशेष रूप से निम्नलिखित बातों का सत्यापन किया जाता है—
- Wheel Profile निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
- Wheel Tread पर असामान्य घिसाव नहीं है।
- Flange सुरक्षित सीमा में है।
- Wheel में दरार अथवा अन्य संरचनात्मक दोष नहीं हैं।
- Axle सामान्य स्थिति में है।
- Roller Bearing में किसी प्रकार की असामान्यता नहीं है।
- Wheel Set का ज्यामितीय संतुलन सुरक्षित है।
Wheel Tread का निरीक्षण
Wheel Tread सीधे Rail के संपर्क में रहने वाला भाग है। इसलिए इसका निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
निरीक्षण के दौरान देखा जाता है कि—
- Tread पर असामान्य घिसाव तो नहीं है।
- सतह पर गड्ढे (Pitting) या धातु उखड़ने (Shelling) के चिन्ह तो नहीं हैं।
- Flat Surface तो विकसित नहीं हो गई है।
- कोई गहरी खरोंच अथवा Impact Damage तो नहीं है।
यदि Tread निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो संबंधित Wheel Set पर आवश्यक तकनीकी कार्यवाही की जाती है।
Flange का निरीक्षण
Flange Wheel का सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। यह Wheel को Rail से उतरने से रोकने में सहायता करता है।
निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं की जाँच की जाती है—
- Flange Thickness
- Flange Height
- Flange Profile
- Sharp Flange
- Thin Flange
- Uneven Wear
इनका परीक्षण स्वीकृत Wheel Profile Gauge अथवा अन्य मानक Gauges द्वारा किया जाता है।
यदि Flange निर्धारित सीमा से अधिक घिस चुका हो अथवा उसका Profile असामान्य हो, तो संबंधित Wheel Set को सेवा में रखना सुरक्षित नहीं माना जाता।
Wheel Profile की जाँच
Wheel Profile का निरीक्षण केवल आँखों से देखने तक सीमित नहीं होता। इसके लिए निर्धारित प्रोफ़ाइल गेज (Profile Gauge) अथवा स्वीकृत माप उपकरणों का उपयोग किया जाता है।
Wheel Profile की जाँच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—
- Wheel एवं Rail का संपर्क सही प्रकार से हो।
- Flange Rail पर अनावश्यक दबाव न डाले।
- Wheel Wear समान रूप से हो।
- Curves पर सुरक्षित रनिंग बनी रहे।
गलत Profile के कारण Wheel Wear, Rail Wear तथा Ride Quality तीनों प्रभावित हो सकते हैं।
Wheel Flat
यदि ब्रेक लगने के दौरान किसी कारण Wheel Rail पर फिसल जाए (Wheel Slide), तो Wheel Tread का एक भाग सपाट (Flat) हो सकता है। इसे Wheel Flat कहा जाता है।
Wheel Flat होने पर सामान्यतः—
- रनिंग के दौरान तेज़ धक्के महसूस होते हैं।
- असामान्य ध्वनि उत्पन्न होती है।
- ट्रैक एवं Wheel दोनों पर अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है।
- Ride Quality प्रभावित होती है।
Wheel Flat की गंभीरता निर्धारित सीमा के अनुसार आँकी जाती है तथा आवश्यक होने पर Wheel Reprofiling अथवा Wheel Replacement किया जाता है।
Shelling एवं Surface Defects
दीर्घकालीन परिचालन के दौरान Wheel Surface पर धातु की पतली परतें टूटकर निकल सकती हैं। इस प्रकार की स्थिति को सामान्यतः Shelling कहा जाता है।
इसके अतिरिक्त—
- Surface Crack
- Metal Flow
- Spalling
- Corrugation
जैसे दोष भी विकसित हो सकते हैं।
इन दोषों की गंभीरता का मूल्यांकन निर्धारित निरीक्षण मानकों के अनुसार किया जाता है।
Axle का निरीक्षण
Axle सामान्यतः अत्यधिक मजबूत अवयव होता है, फिर भी उसका नियमित निरीक्षण आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान देखा जाता है—
- Corrosion
- Mechanical Damage
- Oil अथवा Grease Contamination
- Axle Seat की स्थिति
- Press Fit क्षेत्र की स्थिति
जहाँ आवश्यक हो, वहाँ कार्यशाला स्तर पर Non-Destructive Testing (NDT) विधियों—जैसे Ultrasonic Testing (UT) अथवा Magnetic Particle Testing (MPT)—का उपयोग भी किया जा सकता है।
Wheel Gauge का उपयोग
Wheel Set निरीक्षण में विभिन्न प्रकार के स्वीकृत Gauges का उपयोग किया जाता है। इनका उद्देश्य Wheel Profile एवं अन्य महत्वपूर्ण आयामों का सत्यापन करना होता है।
सामान्यतः निम्न प्रकार के Gauges उपयोग किए जा सकते हैं—
| Gauge | मुख्य उपयोग |
|---|---|
| Wheel Profile Gauge | Wheel Profile की जाँच |
| Flange Gauge | Flange का परीक्षण |
| Back-to-Back Gauge | Wheel दूरी की जाँच |
| Wear Gauge | घिसाव का मूल्यांकन |
निरीक्षण में केवल स्वीकृत एवं अंशांकित (Calibrated) Gauges का ही उपयोग किया जाना चाहिए।
अनुरक्षण के दौरान सामान्य कार्य
Wheel Set अनुरक्षण के दौरान आवश्यकता के अनुसार निम्न कार्य किए जा सकते हैं—
- Wheel Cleaning
- Wheel Gauging
- Visual Inspection
- Wheel Reprofiling
- Bearing Inspection
- Axle Inspection
- Wheel Set Replacement (जहाँ आवश्यक हो)
इन सभी कार्यों का उद्देश्य Wheel Set को निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप बनाए रखना है।
8.8 Wheel Set के सामान्य दोष एवं सावधानियाँ
Wheel Set लगातार गतिशील भार, ब्रेकिंग बल, ट्रैक की अनियमितताओं तथा विभिन्न मौसमीय परिस्थितियों में कार्य करता है। लंबे समय तक सेवा में रहने के कारण इसके विभिन्न अवयवों में घिसाव, धात्विक थकान (Metal Fatigue), तापीय प्रभाव (Thermal Effect) तथा अन्य यांत्रिक दोष उत्पन्न हो सकते हैं। इन दोषों की समय पर पहचान और उचित अनुरक्षण सुरक्षित रेल परिचालन की मूल आवश्यकता है।
Wheel Set के अधिकांश दोष प्रारम्भ में छोटे संकेतों के रूप में दिखाई देते हैं। यदि इन्हें समय रहते पहचान लिया जाए, तो बड़ी खराबियों तथा परिचालन संबंधी जोखिमों से बचा जा सकता है। इसलिए C&W निरीक्षण का उद्देश्य केवल स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले दोषों को ढूँढना नहीं, बल्कि प्रारम्भिक चेतावनी संकेतों की पहचान करना भी है।
Wheel Set में पाए जाने वाले सामान्य दोष
| अवयव | सामान्य दोष |
|---|---|
| Wheel Tread | Wheel Flat, Hollow Tread, Uneven Wear |
| Flange | Thin Flange, Sharp Flange, Flange Wear |
| Wheel Surface | Shelling, Spalling, Surface Crack |
| Wheel Rim | Rim Crack, Metal Flow |
| Wheel Hub | Press Fit Defect, Crack |
| Axle | Mechanical Damage, Corrosion, Fatigue Crack |
| Roller Bearing | Overheating, Grease Leakage, Bearing Failure |
इन दोषों की गंभीरता निर्धारित निरीक्षण मानकों के अनुसार आँकी जाती है। जहाँ आवश्यक हो, संबंधित Wheel Set को Reprofiling, Overhaul अथवा Replacement के लिए भेजा जाता है।
Wheel Flat
Wheel Flat प्रायः Wheel Slide के कारण उत्पन्न होता है। जब ब्रेक लगाने के दौरान Wheel घूमने के बजाय Rail पर फिसलने लगता है, तब Wheel Tread का एक भाग घिसकर सपाट हो जाता है।
इसके सामान्य लक्षण हैं—
- रनिंग के दौरान नियमित धक्के महसूस होना।
- "ठक-ठक" जैसी आवर्ती ध्वनि।
- Tread पर स्पष्ट Flat Spot दिखाई देना।
- Ride Quality में कमी।
यदि Wheel Flat निर्धारित सीमा से अधिक हो, तो संबंधित Wheel Set पर आवश्यक तकनीकी कार्यवाही की जाती है।
Hollow Tread
दीर्घकालीन परिचालन के दौरान कई बार Wheel Tread का मध्य भाग अपेक्षाकृत अधिक घिस जाता है, जिससे उसकी सतह अवतल (Hollow) दिखाई देने लगती है। इसे Hollow Tread कहा जाता है।
इस स्थिति में—
- Wheel–Rail संपर्क प्रभावित हो सकता है।
- Wheel Profile बदल जाती है।
- Ride Quality पर प्रभाव पड़ सकता है।
- Wheel Wear की गति बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में निर्धारित निरीक्षण मानकों के अनुसार Wheel Reprofiling की आवश्यकता हो सकती है।
Flange Wear
Flange लगातार Curves, Turnout तथा अन्य परिचालन परिस्थितियों में कार्य करती है। समय के साथ इसका घिसाव स्वाभाविक है, किन्तु यदि घिसाव निर्धारित सीमा से अधिक हो जाए, तो Wheel का मार्गदर्शन प्रभावित हो सकता है।
Flange Wear का मूल्यांकन स्वीकृत Gauges द्वारा किया जाता है। अत्यधिक घिसी हुई Flange परिचालन सुरक्षा की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं होती।
Shelling एवं Surface Crack
लगातार Wheel–Rail संपर्क, उच्च संपर्क दाब तथा धात्विक थकान के कारण Wheel Surface पर छोटे-छोटे धातु कण उखड़ सकते हैं। इसे सामान्यतः Shelling कहा जाता है।
यदि इस प्रकार के दोषों की उपेक्षा की जाए, तो आगे चलकर Surface Crack अथवा अन्य संरचनात्मक क्षति विकसित हो सकती है।
निरीक्षण के दौरान Wheel Surface को अच्छी रोशनी में ध्यानपूर्वक देखा जाता है तथा संदिग्ध स्थिति में विस्तृत परीक्षण किया जाता है।
Axle संबंधी दोष
यद्यपि Axle का निर्माण अत्यंत मजबूत इस्पात से किया जाता है, फिर भी दीर्घकालीन सेवा के दौरान उसमें विभिन्न प्रकार की समस्याएँ विकसित हो सकती हैं।
मुख्यतः—
- Corrosion
- Mechanical Damage
- Fatigue Crack
- Press Fit क्षेत्र में असामान्यता
जैसे दोषों की जाँच की जाती है।
Axle में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक दोष अत्यंत गंभीर माना जाता है। आवश्यकता पड़ने पर कार्यशाला स्तर पर Non-Destructive Testing (NDT) द्वारा विस्तृत परीक्षण किया जाता है।
Roller Bearing से संबंधित दोष
Wheel Set की विश्वसनीयता काफी हद तक Roller Bearing की स्थिति पर निर्भर करती है। Bearing में दोष होने पर सामान्यतः निम्न संकेत दिखाई दे सकते हैं—
- Bearing Housing का अधिक गर्म होना।
- Grease Leakage।
- असामान्य ध्वनि।
- कंपन में वृद्धि।
- Bearing End Cover के आसपास असामान्य स्थिति।
ऐसे संकेत मिलने पर संबंधित Wheel Set का विस्तृत निरीक्षण आवश्यक होता है।
निरीक्षण के समय अपनाई जाने वाली सावधानियाँ
Wheel Set निरीक्षण सुरक्षा-संवेदनशील कार्य है। निरीक्षण के दौरान कर्मचारी को निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए।
विशेष रूप से ध्यान रखा जाना चाहिए कि—
- रेक उचित रूप से सुरक्षित (Protected) हो।
- निरीक्षण पर्याप्त प्रकाश में किया जाए।
- केवल स्वीकृत एवं अंशांकित (Calibrated) Gauges का उपयोग किया जाए।
- किसी भी संदिग्ध दोष को अनदेखा न किया जाए।
- निरीक्षण का परिणाम सही अभिलेखों में दर्ज किया जाए।
- आवश्यक होने पर वरिष्ठ अधिकारी को तत्काल सूचित किया जाए।
- निर्धारित Condemning Criteria एवं Maintenance Manual के अनुसार ही निर्णय लिया जाए।
Wheel Set अनुरक्षण का महत्व
Wheel Set रेलवे कोच का सबसे महत्वपूर्ण रनिंग अवयव है। इसकी अच्छी स्थिति केवल Wheel की सेवा आयु ही नहीं बढ़ाती, बल्कि सम्पूर्ण रेलगाड़ी की सुरक्षा, Ride Quality तथा परिचालन विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती है।
नियमित निरीक्षण एवं समय पर अनुरक्षण से—
- Wheel एवं Rail Wear कम होता है।
- Roller Bearing की विश्वसनीयता बढ़ती है।
- Ride Quality बेहतर रहती है।
- Derailment की संभावना कम होती है।
- अनियोजित खराबियों में कमी आती है।
- Rolling Stock की उपलब्धता बढ़ती है।
इसी कारण Wheel Set निरीक्षण C&W विभाग की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी गतिविधियों में से एक माना जाता है।
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