अध्याय–10 रेलवे कोच ब्रेक प्रणाली (Railway Coach Brake System) : संरचना, कार्यप्रणाली, निरीक्षण एवं अनुरक्षण

 इस अध्याय में

10.1 ब्रेक प्रणाली का परिचय
10.2 ब्रेक प्रणाली की आवश्यकता एवं सिद्धांत
10.3 एयर ब्रेक प्रणाली का विकास
10.4 एयर ब्रेक प्रणाली के प्रमुख अवयव
10.5 एयर ब्रेक प्रणाली की कार्यप्रणाली
10.6 ब्रेक परीक्षण (Brake Testing)
10.7 निरीक्षण एवं अनुरक्षण
10.8 सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

10.1 ब्रेक प्रणाली का परिचय

रेलवे में किसी रेलगाड़ी को चलाना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है उसे सुरक्षित, नियंत्रित एवं निर्धारित दूरी में रोकना। यही कार्य ब्रेक प्रणाली (Brake System) करती है।

ब्रेक प्रणाली रेलवे कोच की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणालियों (Safety Systems) में से एक है। इसके माध्यम से चालक आवश्यकतानुसार रेलगाड़ी की गति कम करता है, उसे नियंत्रित रखता है तथा आवश्यकता पड़ने पर पूर्णतः रोकता है। यदि ब्रेक प्रणाली सही प्रकार से कार्य न करे, तो सुरक्षित रेल परिचालन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।

ब्रेक केवल आपातकाल में ट्रेन रोकने का साधन नहीं है। सामान्य परिचालन में प्रत्येक स्टेशन पर रुकना, गति नियंत्रित रखना, ढलान (Gradient) पर सुरक्षित संचालन तथा रेक को स्थिर अवस्था में रखना—इन सभी कार्यों में ब्रेक प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

आधुनिक भारतीय रेल में अधिकांश यात्री कोचों में Compressed Air Brake System (एयर ब्रेक प्रणाली) का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली पारंपरिक Vacuum Brake System की तुलना में अधिक प्रभावी, विश्वसनीय तथा अनुरक्षण की दृष्टि से बेहतर मानी जाती है।

C&W विभाग के लिए Brake System का महत्व अत्यधिक है, क्योंकि प्रत्येक Train Examination, Primary Maintenance तथा Secondary Maintenance के दौरान ब्रेक प्रणाली का निरीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाता है। किसी भी सुरक्षा-संबंधी दोष का समय पर पता लगाना और उसका सुधार सुरक्षित रेल संचालन की मूल आवश्यकता है।

10.2 ब्रेक प्रणाली की आवश्यकता

रेलवे कोच का भार सामान्य सड़क वाहनों की तुलना में अत्यधिक होता है। कई बार एक पूर्ण रेलगाड़ी का भार हजारों टन तक पहुँच सकता है। इतनी भारी रेलगाड़ी को केवल इंजन की शक्ति कम करके नहीं रोका जा सकता। इसके लिए प्रत्येक कोच में प्रभावी ब्रेक व्यवस्था आवश्यक होती है।

ब्रेक प्रणाली के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  • आवश्यकता अनुसार ट्रेन की गति कम करना।
  • निर्धारित स्थान पर सुरक्षित रूप से रोकना।
  • आपातकालीन स्थिति में न्यूनतम दूरी में ट्रेन रोकना।
  • ढलान पर ट्रेन को नियंत्रित रखना।
  • पार्किंग अथवा स्टेबलिंग के दौरान रेक को स्थिर रखना।
  • सभी कोचों में समान एवं नियंत्रित ब्रेकिंग बल उपलब्ध कराना।

एक प्रभावी Brake System केवल ब्रेक लगाने का कार्य नहीं करती, बल्कि प्रत्येक Wheel Set पर संतुलित Brake Force उपलब्ध कराकर Wheel Slide, Wheel Flat तथा असमान Brake Wear जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित करती है।

10.3 एयर ब्रेक प्रणाली का विकास

रेलवे के प्रारम्भिक वर्षों में विभिन्न प्रकार की ब्रेक प्रणालियों का उपयोग किया जाता था। समय के साथ परिचालन गति, रेक की लंबाई तथा सुरक्षा मानकों में वृद्धि हुई, जिसके कारण अधिक विश्वसनीय एवं प्रभावी ब्रेक प्रणाली की आवश्यकता महसूस हुई।

भारतीय रेल में लंबे समय तक Vacuum Brake System का उपयोग किया गया। यह अपने समय की सफल प्रणाली थी, किन्तु इसकी कुछ तकनीकी सीमाएँ थीं—

  • ब्रेक लगाने एवं छोड़ने में अपेक्षाकृत अधिक समय।
  • उच्च गति पर सीमित प्रभावशीलता।
  • लंबी रेकों में ब्रेक प्रतिक्रिया का समय अधिक होना।
  • अनुरक्षण की अपेक्षाकृत अधिक आवश्यकता।

इन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए धीरे-धीरे Air Brake System को अपनाया गया।

आज अधिकांश यात्री एवं मालगाड़ियों में Air Brake System का उपयोग किया जाता है। यह प्रणाली संपीड़ित वायु (Compressed Air) के माध्यम से कार्य करती है तथा तेज़, नियंत्रित एवं समान ब्रेकिंग प्रदान करती है।

Air Brake System के प्रमुख लाभ

Air Brake System अपनाने से भारतीय रेल को अनेक तकनीकी लाभ प्राप्त हुए—

  • अधिक प्रभावी ब्रेकिंग।
  • कम प्रतिक्रिया समय।
  • लंबी रेकों में बेहतर Brake Performance।
  • अधिक विश्वसनीयता।
  • कम अनुरक्षण आवश्यकता।
  • उच्च गति पर बेहतर नियंत्रण।
  • बेहतर सुरक्षा।

इन्हीं कारणों से आधुनिक ICF एवं LHB दोनों प्रकार के अधिकांश कोच Air Brake System से सुसज्जित हैं।

ब्रेक प्रणाली का मूल सिद्धांत

Air Brake System का मूल सिद्धांत Compressed Air पर आधारित है।

लोकोमोटिव का Air Compressor संपीड़ित वायु उत्पन्न करता है। यह वायु Brake Pipe तथा अन्य संबंधित पाइपों के माध्यम से सम्पूर्ण रेक में भेजी जाती है। प्रत्येक कोच में स्थित Brake Equipment इस वायु दाब (Air Pressure) के परिवर्तन के आधार पर ब्रेक लगाती अथवा छोड़ती है।

सरल शब्दों में—

  • Pressure सामान्य → Brake Released
  • Pressure कम → Brake Applied

इसी सिद्धांत पर सम्पूर्ण Air Brake System कार्य करती है।

Air Brake System की मुख्य विशेषताएँ

Air Brake System की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

विशेषता                                   विवरण
कार्य माध्यमCompressed Air
ब्रेक नियंत्रणAir Pressure द्वारा
प्रतिक्रियातेज़ एवं नियंत्रित
सभी कोचों में समान प्रभावहाँ
आधुनिक कोचों में उपयोगव्यापक
सुरक्षाउच्च

C&W कर्मचारी की दृष्टि से महत्व

C&W कर्मचारी के लिए Air Brake System का ज्ञान केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसे यह भी समझना आवश्यक है कि—

  • Brake Pipe Pressure क्यों घटती है?
  • Leakage कहाँ से हो सकती है?
  • Brake Cylinder कब कार्य करता है?
  • Distributor Valve का क्या कार्य है?
  • Brake Binding क्यों होता है?
  • Brake Power Test कैसे किया जाता है?

इन्हीं प्रश्नों के उत्तर आगे इस अध्याय में क्रमबद्ध रूप से समझे जाएँगे।

व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए कि किसी एक्सप्रेस ट्रेन के Primary Maintenance के दौरान Brake Continuity Test किया जा रहा है। यदि किसी एक कोच में Brake Pipe का दबाव सामान्य रूप से स्थापित नहीं हो रहा है, तो केवल उसी कोच की ब्रेक प्रणाली प्रभावित नहीं होगी, बल्कि पूरी रेक की Brake Performance पर प्रभाव पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में C&W कर्मचारी क्रमवार जाँच करता है—

  • Air Hose सही जुड़ी है या नहीं।
  • Angle Cock खुला है या नहीं।
  • Brake Pipe में Leakage तो नहीं है।
  • Distributor Valve सामान्य कार्य कर रही है या नहीं।
  • Brake Cylinder की प्रतिक्रिया सही है या नहीं।

यही क्रमबद्ध जाँच Brake दोषों की सही पहचान का आधार है।

10.4 Air Brake System के प्रमुख अवयव

Air Brake System अनेक यांत्रिक एवं वायवीय (Pneumatic) अवयवों से मिलकर बनी एक समन्वित प्रणाली है। प्रत्येक अवयव का कार्य अलग है, परन्तु सभी एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। यदि किसी एक महत्वपूर्ण अवयव में दोष उत्पन्न हो जाए, तो पूरी ब्रेक प्रणाली प्रभावित हो सकती है।

Air Brake System को समझने का सबसे सरल तरीका यह है कि पहले इसके मुख्य अवयवों को पहचान लिया जाए और फिर उनकी कार्यप्रणाली को क्रमशः समझा जाए।

Air Brake System का सामान्य विन्यास

ब्रेक प्रणाली के प्रमुख अवयवों को निम्न प्रवाह से समझा जा सकता है—

Locomotive Air Compressor
Brake Pipe (BP)
Feed Pipe (FP)
Air Hose Coupling
Angle Cock
Dirt Collector
Distributor Valve
Auxiliary Reservoir
Brake Cylinder
Automatic Slack Adjuster
Brake Rigging
Brake Block / Disc Brake
Wheel

नोट: वास्तविक Pipe Layout एवं Component Arrangement कोच के प्रकार (ICF/LHB) तथा स्वीकृत डिज़ाइन के अनुसार कुछ भिन्न हो सकती है, परन्तु मूल सिद्धांत समान रहता है।

Air Compressor (लोकोमोटिव)

Air Brake System की शुरुआत लोकोमोटिव से होती है।

लोकोमोटिव में लगा Air Compressor वातावरण की वायु को संपीड़ित (Compress) करके निर्धारित दाब पर उपलब्ध कराता है। यही संपीड़ित वायु पूरी रेलगाड़ी की Brake System का ऊर्जा स्रोत होती है।

C&W कर्मचारी सामान्यतः Compressor का अनुरक्षण नहीं करता, किन्तु उसे यह अवश्य समझना चाहिए कि यदि लोकोमोटिव से पर्याप्त Air Pressure उपलब्ध नहीं होगी, तो पूरी रेक की ब्रेक प्रणाली प्रभावित होगी।

Brake Pipe (BP)

Brake Pipe सम्पूर्ण रेक की मुख्य नियंत्रण पाइप (Control Pipe) है।

लोकोमोटिव से उत्पन्न Air Pressure Brake Pipe के माध्यम से प्रत्येक कोच तक पहुँचती है। Brake Pipe में होने वाला Pressure Change ही प्रत्येक कोच की Brake Application तथा Brake Release को नियंत्रित करता है।

Brake Pipe की प्रमुख विशेषताएँ—

  • सम्पूर्ण रेक में निरंतर जुड़ी रहती है।
  • सभी कोचों को एक साथ नियंत्रित करती है।
  • Pressure कम होने पर Brake Apply होती है।
  • Pressure सामान्य होने पर Brake Release होती है।

Brake Pipe में Leakage Air Brake System की सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है।

Feed Pipe (FP)

Feed Pipe का मुख्य कार्य प्रत्येक कोच के Air Reservoir को आवश्यक संपीड़ित वायु उपलब्ध कराना है।

Brake Pipe जहाँ ब्रेक नियंत्रण का कार्य करती है, वहीं Feed Pipe Air Supply बनाए रखने का कार्य करती है।

Feed Pipe के प्रमुख कार्य—

  • Reservoir Charging।
  • Air Pressure बनाए रखना।
  • Brake System को पुनः तैयार रखना।
  • बार-बार Brake लगाने की स्थिति में पर्याप्त Air उपलब्ध कराना।

Air Hose Coupling

प्रत्येक कोच की Brake Pipe एवं Feed Pipe को अगले कोच से जोड़ने के लिए Flexible Air Hose का उपयोग किया जाता है।

दो Air Hose को जोड़ने वाले भाग को Air Hose Coupling कहा जाता है।

इसके मुख्य कार्य—

  • दो कोचों के बीच Air Passage बनाए रखना।
  • Pipe Line की Continuity बनाए रखना।
  • Air Leakage रोकना।

निरीक्षण के दौरान Hose में—

  • Crack
  • Hardening
  • Leakage
  • Coupling Damage

की विशेष जाँच की जाती है।

Angle Cock

Angle Cock प्रत्येक Brake Pipe तथा Feed Pipe के दोनों सिरों पर लगाया जाता है।

इसका मुख्य कार्य—

  • Air Flow को नियंत्रित करना।
  • Pipe को आवश्यकता अनुसार बंद करना।
  • कोच को रेक से अलग करते समय Air Leakage रोकना।

यदि Angle Cock सही स्थिति में न हो, तो पूरी Brake Continuity प्रभावित हो सकती है।

Dirt Collector

Compressed Air के साथ कभी-कभी धूल, जंग के कण अथवा नमी भी Pipe Line में आ सकती है।

इन अशुद्धियों को Distributor Valve तक पहुँचने से रोकने के लिए Dirt Collector लगाया जाता है।

यदि Dirt Collector समय पर साफ न किया जाए, तो—

  • Air Flow प्रभावित हो सकता है।
  • Valve में समस्या आ सकती है।
  • Brake Response धीमा हो सकता है।

Distributor Valve

Distributor Valve Air Brake System का सबसे महत्वपूर्ण नियंत्रण अवयव (Control Unit) है।

Brake Pipe में Pressure परिवर्तन होने पर यही Valve निर्धारित करता है—

  • Brake लगानी है,
  • Brake छोड़नी है,
  • अथवा Brake Cylinder में कितनी Air भेजनी है।

सरल शब्दों में—

Air Brake System का "मस्तिष्क (Brain)" Distributor Valve है।

इसकी कार्यप्रणाली हम अगले अनुभाग में विस्तार से समझेंगे।

Auxiliary Reservoir

Auxiliary Reservoir एक Air Storage Tank है।

इसका कार्य है—

  • आवश्यक मात्रा में Compressed Air संग्रहित रखना।
  • Brake लगाने के समय Brake Cylinder को Air उपलब्ध कराना।
  • Brake Release होने पर पुनः Charge होना।

यदि Reservoir ठीक प्रकार Charge न हो, तो Brake Power प्रभावित हो सकती है।

Brake Cylinder

Brake Cylinder वह Pneumatic Unit है जहाँ Air Pressure को Mechanical Force में परिवर्तित किया जाता है।

जब Distributor Valve Air भेजती है—

  • Brake Cylinder का Piston आगे बढ़ता है।
  • Mechanical Linkage सक्रिय होता है।
  • Brake Rigging कार्य करती है।
  • Brake Block अथवा Disc Brake Wheel पर दबाव बनाती है।

यही वह स्थान है जहाँ Pneumatic Energy वास्तव में Braking Force में बदलती है।

Automatic Slack Adjuster

Brake Block लगातार उपयोग से घिसते रहते हैं।

यदि इस घिसाव की भरपाई न की जाए, तो Brake Cylinder का Stroke बढ़ जाएगा और Brake Efficiency कम हो जाएगी।

इसी समस्या को दूर करने के लिए Automatic Slack Adjuster लगाया जाता है।

इसका कार्य—

  • Brake Clearance को निर्धारित सीमा में रखना।
  • Brake Block Wear की स्वतः भरपाई करना।
  • समान Brake Performance बनाए रखना।

Brake Rigging

Brake Rigging विभिन्न Mechanical Links, Lever, Rod एवं Pin का समूह है।

इसका कार्य—

  • Brake Cylinder से उत्पन्न बल को सभी Wheels तक समान रूप से पहुँचाना।
  • सभी Brake Blocks पर लगभग समान दबाव उपलब्ध कराना।

Brake Rigging में ढीलापन अथवा Wear होने पर Brake Efficiency प्रभावित हो सकती है।

Brake Block / Disc Brake

यह Brake System का अंतिम कार्यकारी भाग (Final Working Element) है।

ICF कोचों में सामान्यतः Brake Block व्यवस्था मिलती है, जबकि LHB कोचों में अधिकांशतः Disc Brake प्रणाली प्रयुक्त होती है।

इनका कार्य Wheel Rotation को नियंत्रित करना तथा आवश्यक Braking Force उत्पन्न करना है।

C&W कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

Air Brake System को समझने का सबसे सरल क्रम है—

Air Pressure बनती है
Brake Pipe में जाती है
Distributor Valve नियंत्रित करती है
Brake Cylinder कार्य करता है
Brake Rigging चलती है
Brake Block / Disc Brake Wheel को रोकती है

यदि यह क्रम अच्छी तरह समझ में आ गया, तो पूरी Air Brake System का सिद्धांत स्वतः स्पष्ट हो जाएगा।

10.5 Air Brake System की कार्यप्रणाली (Working of Air Brake System)

Air Brake System का कार्य संपीड़ित वायु (Compressed Air) के नियंत्रित उपयोग पर आधारित है। लोकोमोटिव द्वारा उत्पन्न वायु दाब पूरी रेक में Brake Pipe एवं Feed Pipe के माध्यम से पहुँचाई जाती है। प्रत्येक कोच में स्थित Distributor Valve इस वायु दाब में होने वाले परिवर्तन को पहचानती है और उसी के अनुसार Brake Cylinder को नियंत्रित करती है।

पूरी प्रणाली को समझने के लिए इसे पाँच चरणों में अध्ययन करना सबसे उपयुक्त है—

  1. Charging Stage
  2. Brake Released Condition
  3. Service Brake Application
  4. Emergency Brake Application
  5. Brake Release एवं Recharging

1. Charging Stage (सिस्टम चार्ज होना)

जब लोकोमोटिव चालू होता है, तब Air Compressor संपीड़ित वायु उत्पन्न करता है। यह वायु Brake Pipe (BP) तथा Feed Pipe (FP) के माध्यम से पूरी रेक में प्रवाहित होती है।

इस अवस्था में—

  • Brake Pipe निर्धारित दाब तक चार्ज होती है।
  • Feed Pipe भी चार्ज होती है।
  • Auxiliary Reservoir में वायु भरती है।
  • Distributor Valve चार्जिंग स्थिति में रहती है।
  • Brake Cylinder में दाब नहीं होती।
  • Brake Released अवस्था बनी रहती है।

यह ट्रेन के चलने से पहले की सामान्य स्थिति है।

Charging Stage का प्रवाह

Air Compressor
Brake Pipe + Feed Pipe
Distributor Valve
Auxiliary Reservoir Charged
Brake Cylinder Empty
Brake Released

2. Brake Released Condition

जब Brake Pipe का दाब सामान्य स्तर पर रहता है, तब Distributor Valve Brake Cylinder में वायु नहीं भेजती।

इस स्थिति में—

  • Brake Block Wheel से अलग रहती है।
  • Wheel स्वतंत्र रूप से घूमता है।
  • ट्रेन सामान्य रूप से चलती रहती है।
  • Reservoir अगली Brake Application के लिए तैयार रहता है।

इसे सामान्य रनिंग अवस्था कहा जाता है।

3. Service Brake Application

जब चालक Brake Valve का संचालन करता है, तब Brake Pipe का दाब नियंत्रित रूप से कम किया जाता है।

Brake Pipe का Pressure घटते ही Distributor Valve इस परिवर्तन को पहचान लेती है और Auxiliary Reservoir में संग्रहित वायु को Brake Cylinder की ओर भेज देती है।

इसके बाद—

  • Brake Cylinder का Piston आगे बढ़ता है।
  • Brake Rigging सक्रिय होती है।
  • Brake Block अथवा Disc Brake Wheel पर दबाव बनाती है।
  • Wheel की गति नियंत्रित होने लगती है।

यही सामान्य Service Brake Application है।

Service Brake का प्रवाह

Brake Pipe Pressure ↓
Distributor Valve Operates
Auxiliary Reservoir
Brake Cylinder
Brake Rigging
Brake Block / Disc Brake
Wheel Braking

4. Emergency Brake Application

यदि चालक Emergency Brake लगाता है अथवा Brake Pipe में अचानक अधिक Pressure Drop हो जाता है, तो Distributor Valve Brake Cylinder को अधिक तीव्रता से वायु उपलब्ध कराती है।

इस स्थिति में—

  • Brake बहुत तेजी से लगती है।
  • सभी कोच लगभग एक साथ प्रतिक्रिया देते हैं।
  • न्यूनतम संभव दूरी में ट्रेन रोकने का प्रयास होता है।

Emergency Brake केवल वास्तविक आवश्यकता होने पर ही उपयोग की जाती है, क्योंकि इससे Wheel, Brake Block तथा अन्य रनिंग अवयवों पर अधिक भार पड़ता है।

5. Brake Release एवं Recharging

जब चालक Brake छोड़ता है, तब Brake Pipe का दाब पुनः सामान्य स्तर तक बढ़ाया जाता है।

इसके बाद—

  • Distributor Valve Brake Cylinder की वायु बाहर निकाल देती है।
  • Brake Block Wheel से अलग हो जाती है।
  • Auxiliary Reservoir पुनः चार्ज होने लगता है।
  • पूरी प्रणाली अगली Brake Application के लिए तैयार हो जाती है।

Brake Release का प्रवाह

Brake Pipe Pressure Restored
Distributor Valve Resets
Brake Cylinder Exhausts
Brake Block Released
Wheel Free to Rotate
Auxiliary Reservoir Recharged

Air Brake System का Fail-Safe सिद्धांत

Air Brake System की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका Fail-Safe Principle है।

इस प्रणाली में यदि—

  • Brake Pipe टूट जाए,
  • Hose अलग हो जाए,
  • Pipe में गंभीर Leakage हो जाए,
  • अथवा Air Pressure अचानक समाप्त हो जाए,

तो Brake Pipe का दाब कम हो जाता है और Distributor Valve स्वतः Brake Apply कर देती है।

अर्थात्—

Air Pressure समाप्त होने पर ट्रेन बिना ब्रेक के नहीं चलती, बल्कि ब्रेक स्वतः लग जाती है।

यही Air Brake System की सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा विशेषता है।

C&W कर्मचारी की दृष्टि से कार्यप्रणाली

जब Brake System सामान्य रूप से कार्य कर रही होती है, तब निरीक्षण के दौरान निम्न बातें सत्यापित की जाती हैं—

  • Brake Pipe Continuity सही है।
  • Feed Pipe सामान्य है।
  • Air Leakage नहीं है।
  • Brake Cylinder सही Stroke ले रही है।
  • Brake Rigging स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है।
  • Brake Block/Pad समान रूप से कार्य कर रहे हैं।
  • Brake Release पूर्ण रूप से हो रही है।

यदि इनमें से किसी एक चरण में भी समस्या आती है, तो पूरी Brake Performance प्रभावित हो सकती है।

व्यावहारिक उदाहरण

Primary Maintenance के दौरान Brake Continuity Test किया गया। पूरी रेक में Brake Pipe का दाब सामान्य था, लेकिन एक कोच की Brake Cylinder कार्य नहीं कर रही थी।

ऐसी स्थिति में संभावित कारण हो सकते हैं—

  • Distributor Valve में खराबी।
  • Brake Cylinder में दोष।
  • Air Passage अवरुद्ध होना।
  • Pipe Connection में Leakage।
  • Brake Rigging जाम होना।

ऐसे मामलों में केवल Brake Block बदल देना पर्याप्त नहीं होगा। दोष का मूल कारण पहचानकर ही उचित सुधारात्मक कार्यवाही करनी होगी।

निरीक्षण के समय विशेष ध्यान दें

  • Brake Pipe एवं Feed Pipe में किसी प्रकार का Leakage न हो।
  • Hose Coupling सुरक्षित रूप से जुड़ी हो।
  • Angle Cock सही स्थिति में हो।
  • Brake Cylinder का Stroke सामान्य हो।
  • Brake Rigging में Binding या Excessive Play न हो।
  • Brake Release पूर्ण रूप से हो रही हो।
  • Brake Block या Brake Pad का घिसाव निर्धारित सीमा के भीतर हो।

बहुत अच्छा। अब हम Chapter–10 के सबसे व्यावहारिक भाग में प्रवेश करते हैं। यह वही कार्य है जो प्रत्येक Coaching Depot, Pit Line तथा Primary Maintenance Depot में नियमित रूप से किया जाता है।

यहाँ एक बात का विशेष ध्यान रखेंगे।

हम किसी Zone या Depot की Local SOP नहीं लिखेंगे, बल्कि भारतीय रेल में प्रचलित सामान्य सिद्धांत, C&W की भूमिका और मानक अवधारणाएँ लिखेंगे। इससे पुस्तक पूरे भारतीय रेल नेटवर्क के लिए उपयोगी रहेगी।

10.6 Brake Testing (ब्रेक परीक्षण)

किसी भी रेलगाड़ी को सेवा में लगाने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उसकी ब्रेक प्रणाली निर्धारित मानकों के अनुसार कार्य कर रही है। केवल Brake Components का निरीक्षण पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पूरी प्रणाली की कार्यक्षमता का परीक्षण भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के Brake Tests किए जाते हैं।

Brake Testing का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • पूरी रेक में Brake Pipe एवं Feed Pipe की Continuity सही है।
  • सभी कोचों में Brake समान रूप से कार्य कर रही है।
  • Air Leakage स्वीकार्य सीमा के भीतर है।
  • Brake Cylinder सही प्रकार से कार्य कर रही है।
  • Brake Release पूर्ण रूप से हो रही है।
  • पूरी रेक सुरक्षित रूप से सेवा देने के लिए तैयार है।

Brake Testing के प्रमुख प्रकार

भारतीय रेल में आवश्यकता एवं अनुरक्षण स्तर के अनुसार विभिन्न प्रकार के Brake Tests किए जाते हैं।

मुख्य परीक्षण निम्नलिखित हैं—

परीक्षणउद्देश्य
Brake Continuity Testपूरी रेक में Brake Pipe Continuity की जाँच
Brake Application TestBrake लगाने की क्रिया की जाँच
Brake Release TestBrake छोड़ने की क्रिया की जाँच
Leakage TestAir Leakage का परीक्षण
Brake Cylinder Stroke CheckBrake Cylinder की कार्यक्षमता की जाँच
Brake Power Verificationसंपूर्ण ब्रेक प्रणाली की प्रभावशीलता का सत्यापन

Brake Continuity Test

Brake Continuity Test सबसे महत्वपूर्ण परीक्षणों में से एक है।

इस परीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि Brake Pipe का Air Pressure लोकोमोटिव से लेकर रेक के अंतिम कोच तक बिना किसी रुकावट के पहुँच रहा है।

यदि किसी स्थान पर—

  • Hose ठीक से नहीं जुड़ी,
  • Angle Cock बंद है,
  • Pipe Line में रुकावट है,
  • अथवा Leakage है,

तो Brake Continuity प्रभावित हो सकती है।

Brake Continuity सही न होने पर पूरी रेक की Brake Performance प्रभावित हो सकती है।

Brake Continuity Test का सिद्धांत

Locomotive
Brake Pipe Charged
Coach–1
Coach–2
Coach–3
................
Last Coach
Brake Pipe Pressure
पूरी रेक में उपलब्ध होना चाहिए।

Brake Application Test

इस परीक्षण में यह देखा जाता है कि Brake Command मिलने पर सभी कोचों में Brake सही समय पर कार्य कर रही है या नहीं।

निरीक्षण के दौरान सामान्यतः निम्न बातों पर ध्यान दिया जाता है—

  • Brake Cylinder कार्य कर रही है।
  • Brake Rigging चल रही है।
  • Brake Block अथवा Disc Brake कार्य कर रही है।
  • सभी Wheels पर समान Brake प्रभाव है।

यदि किसी कोच में Brake Apply नहीं हो रही हो, तो उसका कारण अलग से खोजा जाता है।

Brake Release Test

Brake लगाने के बाद उतना ही महत्वपूर्ण है उसका सही प्रकार से Release होना।

Brake Release Test के दौरान देखा जाता है—

  • Brake Block Wheel से पूरी तरह अलग हो गई है।
  • Brake Cylinder सामान्य स्थिति में लौट आई है।
  • Brake Rigging स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है।
  • किसी Wheel पर Brake Binding नहीं है।

यदि Brake पूरी तरह Release न हो, तो Wheel Wear तथा Brake Overheating जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

Leakage Test

Air Brake System पूर्णतः Air Tight नहीं होती, किन्तु Leakage निर्धारित स्वीकार्य सीमा के भीतर होनी चाहिए।

Leakage Test का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—

  • Brake Pipe में अत्यधिक Leakage नहीं है।
  • Feed Pipe सुरक्षित है।
  • Hose एवं Coupling ठीक हैं।
  • Air Reservoir सामान्य Pressure बनाए रख रहा है।

Leakage अधिक होने पर Brake Performance प्रभावित हो सकती है।

Brake Cylinder Stroke Check

Brake Cylinder का Stroke उसकी कार्यक्षमता का महत्वपूर्ण संकेतक है।

यदि Stroke—

  • बहुत कम हो,
  • बहुत अधिक हो,
  • अथवा असमान हो,

तो Brake Rigging, Slack Adjuster अथवा अन्य अवयवों में समस्या हो सकती है।

निरीक्षण के दौरान Stroke का सत्यापन निर्धारित रेलवे मानकों के अनुसार किया जाता है।

Brake Power Verification

Brake Testing का अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरी रेक आवश्यक Brake Power उपलब्ध करा रही है।

Brake Power Verification के दौरान समग्र रूप से देखा जाता है कि—

  • सभी कोच Brake Command का सही उत्तर दे रहे हैं।
  • Brake समान रूप से कार्य कर रही है।
  • कोई Wheel Brake से वंचित नहीं है।
  • Brake Release सामान्य है।
  • पूरी रेक सुरक्षित रूप से सेवा के लिए तैयार है।

Brake Testing के दौरान सामान्य दोष

परीक्षण के दौरान निम्न प्रकार की समस्याएँ सामने आ सकती हैं—

समस्यासंभावित कारण
Brake Apply नहीं हो रहीDistributor Valve, Air Supply या Brake Cylinder में दोष
Brake Release नहीं हो रहीBrake Binding, Rigging Problem, Cylinder Defect
Brake Pipe Pressure कमLeakage, Hose या Angle Cock में समस्या
Brake Cylinder Stroke असामान्यSlack Adjuster या Brake Rigging में दोष
बार-बार Air Pressure कम होनाSystem Leakage या Reservoir Charging में समस्या

इन दोषों की पुष्टि के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुधारात्मक कार्यवाही की जाती है।

C&W कर्मचारी के लिए महत्वपूर्ण बिंदु

Brake Testing के समय निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—

  • परीक्षण निर्धारित क्रम में किया जाए।
  • Brake Pipe एवं Feed Pipe का Pressure सामान्य हो।
  • किसी भी Hose Connection को नज़रअंदाज़ न किया जाए।
  • Brake Cylinder की प्रतिक्रिया सभी कोचों में देखी जाए।
  • Brake Release पूर्णतः सुनिश्चित की जाए।
  • परीक्षण के परिणाम का सही अभिलेखन किया जाए।

व्यावहारिक उदाहरण

एक Primary Maintenance Depot में Brake Continuity Test के दौरान अंतिम दो कोचों में Brake Apply नहीं हुई।

क्रमिक निरीक्षण में पाया गया कि बीच के एक कोच का Angle Cock बंद था। परिणामस्वरूप Brake Pipe का Air Pressure आगे नहीं पहुँच सका।

Angle Cock को सही स्थिति में लाने के बाद पुनः परीक्षण किया गया और पूरी रेक में Brake सामान्य रूप से कार्य करने लगी।

यह उदाहरण दर्शाता है कि कई बार बड़ी समस्या का कारण एक छोटा-सा परिचालन दोष भी हो सकता है।

निरीक्षण के समय विशेष ध्यान दें

  • Brake Test हमेशा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करें।
  • Brake Apply और Brake Release दोनों का परीक्षण करें।
  • केवल Pressure देखकर परीक्षण पूरा न मानें; Brake Cylinder एवं Brake Rigging की वास्तविक प्रतिक्रिया भी देखें।
  • यदि किसी कोच में असामान्यता मिले, तो पूरी रेक की Brake Performance पर उसका प्रभाव समझें।
  • परीक्षण पूरा होने के बाद ही रेक को सेवा के लिए उपयुक्त घोषित करें।

10.7 ब्रेक प्रणाली का निरीक्षण एवं अनुरक्षण

रेलवे कोच की ब्रेक प्रणाली का नियमित निरीक्षण एवं अनुरक्षण सुरक्षित रेल परिचालन की आधारशिला है। ब्रेक प्रणाली में उत्पन्न छोटी-सी खराबी भी पूरी रेक की ब्रेक क्षमता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए प्रत्येक निर्धारित अनुरक्षण अनुसूची (Maintenance Schedule) के दौरान ब्रेक प्रणाली का विस्तृत निरीक्षण किया जाता है।

निरीक्षण का उद्देश्य केवल दोष ढूँढ़ना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ब्रेक प्रणाली के सभी यांत्रिक एवं वायवीय अवयव एक समन्वित इकाई के रूप में सही प्रकार से कार्य कर रहे हैं।

निरीक्षण के प्रमुख उद्देश्य

ब्रेक प्रणाली के निरीक्षण के दौरान निम्नलिखित बातों का सत्यापन किया जाता है—

  • Air Brake System पूर्णतः कार्यशील है।
  • Brake Pipe एवं Feed Pipe सुरक्षित हैं।
  • किसी भी स्थान पर असामान्य Air Leakage नहीं है।
  • Brake Cylinder सामान्य रूप से कार्य कर रही है।
  • Brake Rigging स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही है।
  • Brake Block अथवा Brake Pad निर्धारित सीमा के भीतर है।
  • सभी सुरक्षा उपकरण (Safety Fittings) सही स्थिति में हैं।

Pit Line Inspection

Pit Line Inspection के दौरान C&W कर्मचारी कोच के नीचे जाकर ब्रेक प्रणाली का क्रमबद्ध निरीक्षण करता है।

निरीक्षण सामान्यतः निम्न क्रम में किया जाता है—

  1. Brake Pipe एवं Feed Pipe
  2. Air Hose एवं Hose Coupling
  3. Angle Cock
  4. Dirt Collector
  5. Distributor Valve
  6. Auxiliary Reservoir
  7. Brake Cylinder
  8. Automatic Slack Adjuster
  9. Brake Rigging
  10. Brake Block अथवा Disc Brake

इस क्रम से निरीक्षण करने पर किसी भी महत्वपूर्ण अवयव के छूटने की संभावना कम हो जाती है।

Brake Pipe एवं Feed Pipe का निरीक्षण

Brake Pipe एवं Feed Pipe पूरी Air Brake System की मुख्य पाइप लाइनें हैं।

निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है—

  • Pipe पर Crack या Mechanical Damage।
  • Pipe Clamp सुरक्षित है।
  • Pipe में Corrosion नहीं है।
  • Leakage के चिन्ह नहीं हैं।
  • Flexible Hose सही स्थिति में है।
  • Pipe Alignment सामान्य है।

Pipe पर किसी प्रकार का बाहरी आघात या विकृति आगे चलकर Air Leakage का कारण बन सकती है।

Air Hose एवं Coupling का निरीक्षण

प्रत्येक कोच के दोनों सिरों पर लगी Air Hose का निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

निरीक्षण के दौरान देखा जाता है—

  • Hose में दरार नहीं है।
  • Rubber कठोर (Hard) नहीं हुआ है।
  • Coupling सही प्रकार से जुड़ रही है।
  • Rubber Gasket सुरक्षित है।
  • Leakage के चिन्ह नहीं हैं।

क्षतिग्रस्त Hose पूरी रेक की Brake Continuity को प्रभावित कर सकती है।

Angle Cock का निरीक्षण

Angle Cock की जाँच करते समय यह सुनिश्चित किया जाता है कि—

  • Cock पूर्णतः खुल एवं बंद हो रही है।
  • Handle सुरक्षित है।
  • Leakage नहीं है।
  • Mounting मजबूत है।

यदि Angle Cock ठीक से कार्य न करे, तो संबंधित कोच अथवा पूरी रेक की Brake Pipe प्रभावित हो सकती है।

Distributor Valve का निरीक्षण

Distributor Valve Brake System का नियंत्रण केंद्र है।

Visual Inspection के दौरान मुख्य रूप से देखा जाता है—

  • Air Leakage नहीं है।
  • Mounting Bolts सुरक्षित हैं।
  • Pipe Connections सही हैं।
  • Dust Cover सुरक्षित है।
  • बाहरी क्षति नहीं है।

इसके अतिरिक्त Brake Test के दौरान Distributor Valve की कार्यप्रणाली का अप्रत्यक्ष सत्यापन भी किया जाता है।

Auxiliary Reservoir का निरीक्षण

Auxiliary Reservoir का निरीक्षण करते समय ध्यान दिया जाता है—

  • Air Leakage नहीं है।
  • Reservoir सुरक्षित रूप से Mount है।
  • Drain व्यवस्था सामान्य है।
  • बाहरी Corrosion नहीं है।
  • Pipe Connections सुरक्षित हैं।

Reservoir का सही Charging होना Brake Performance के लिए आवश्यक है।

Brake Cylinder का निरीक्षण

Brake Cylinder निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।

विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाता है—

  • Cylinder Body में Damage नहीं है।
  • Air Leakage नहीं है।
  • Piston सामान्य Stroke ले रहा है।
  • Push Rod सीधी है।
  • Mounting सुरक्षित है।
  • Return Action सामान्य है।

यदि Brake Cylinder सही प्रकार से कार्य न करे, तो Brake Force सीधे प्रभावित होती है।

Automatic Slack Adjuster का निरीक्षण

Automatic Slack Adjuster का उद्देश्य Brake Block Wear की स्वतः भरपाई करना है।

निरीक्षण के दौरान देखा जाता है—

  • बाहरी Damage नहीं है।
  • Mounting सुरक्षित है।
  • Linkage स्वतंत्र रूप से कार्य कर रही है।
  • Adjustment सामान्य है।

यदि Slack Adjuster कार्य न करे, तो Brake Cylinder Stroke धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और Brake Efficiency कम हो सकती है।

Brake Rigging का निरीक्षण

Brake Rigging में अनेक Lever, Rod, Pin तथा Link लगे होते हैं।

निरीक्षण के दौरान निम्न बिंदुओं की जाँच की जाती है—

  • Bent Lever
  • Loose Pin
  • Missing Split Pin
  • Excessive Wear
  • Binding
  • Improper Alignment

Brake Rigging का प्रत्येक जोड़ स्वतंत्र रूप से कार्य करना चाहिए।

Brake Block / Brake Pad का निरीक्षण

ब्रेक प्रणाली का अंतिम कार्यकारी भाग Brake Block (ICF) अथवा Brake Pad (LHB Disc Brake) होता है।

निरीक्षण के दौरान देखा जाता है—

  • Wear समान है।
  • Thickness निर्धारित सीमा में है।
  • Crack नहीं है।
  • Oil या Grease Contamination नहीं है।
  • Mounting सुरक्षित है।

Brake Block या Pad का असमान घिसाव Brake Rigging की समस्या का संकेत भी हो सकता है।

निरीक्षण के दौरान प्रयुक्त सामान्य उपकरण

ब्रेक प्रणाली के निरीक्षण में आवश्यकता के अनुसार निम्न उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है—

उपकरणमुख्य उपयोग
Inspection Lampअंडरगियर निरीक्षण
Inspection Mirrorकठिन स्थानों का निरीक्षण
Soap Solution*Air Leakage की जाँच (जहाँ लागू)
Steel ScaleWear जाँच
Feeler GaugeGap जाँच (जहाँ आवश्यक)
Torque Wrenchकार्यशाला स्तर पर Fastening

*Soap Solution का उपयोग संबंधित अनुरक्षण प्रक्रिया एवं परिस्थितियों के अनुसार किया जा सकता है।

व्यावहारिक उदाहरण

Pit Line निरीक्षण के दौरान एक कोच में Brake Cylinder सामान्य Stroke ले रही थी, लेकिन Brake Block Wheel से पूर्ण संपर्क नहीं बना रही थी।

आगे निरीक्षण करने पर पाया गया कि Brake Rigging के एक Lever Pin में अत्यधिक Wear था, जिससे पूरा Linkage प्रभावित हो रहा था।

Pin बदलने एवं आवश्यक Adjustment के बाद Brake System पुनः सामान्य रूप से कार्य करने लगी।

यह उदाहरण दर्शाता है कि समस्या हमेशा Brake Cylinder में नहीं होती; कई बार कारण Mechanical Linkage में भी हो सकता है।

निरीक्षण के समय विशेष ध्यान दें

  • Brake System का निरीक्षण हमेशा निर्धारित क्रम में करें।
  • Air Leakage को कभी भी सामान्य न मानें।
  • Brake Cylinder Stroke का अवलोकन अवश्य करें।
  • Brake Rigging में Missing Split Pin विशेष रूप से देखें।
  • Brake Block या Brake Pad का Wear समान होना चाहिए।
  • किसी भी सुरक्षा-संबंधी दोष को अगले निरीक्षण तक स्थगित न करें।

10.8 ब्रेक प्रणाली के सामान्य दोष एवं सावधानियाँ

रेलवे कोच की ब्रेक प्रणाली एक संयुक्त यांत्रिक एवं वायवीय (Mechanical & Pneumatic) प्रणाली है। इसमें अनेक अवयव एक-दूसरे के साथ समन्वित होकर कार्य करते हैं। यदि किसी एक अवयव में भी दोष उत्पन्न हो जाए, तो पूरी ब्रेक प्रणाली की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

ब्रेक प्रणाली में उत्पन्न अधिकांश खराबियाँ अचानक नहीं होतीं, बल्कि प्रारम्भिक अवस्था में कुछ संकेत दिखाई देने लगते हैं। इन संकेतों की समय पर पहचान तथा उचित अनुरक्षण द्वारा अधिकांश गंभीर खराबियों को रोका जा सकता है।

ब्रेक प्रणाली में पाए जाने वाले सामान्य दोष

अवयवसामान्य दोष
Brake PipeAir Leakage, Crack, Damage
Feed PipeLeakage, Pipe Damage
Air HoseCrack, Hardening, Leakage
Angle CockLeakage, Jamming, Handle Damage
Distributor ValveMalfunction, Air Leakage
Brake CylinderAir Leakage, Piston Defect
Slack AdjusterImproper Adjustment, Jamming
Brake RiggingLoose Pin, Bent Lever, Excessive Wear
Brake Block / PadUneven Wear, Crack, Oil Contamination
Disc BrakeDisc Wear, Surface Crack (जहाँ लागू)

Air Leakage

Air Leakage Air Brake System की सबसे सामान्य समस्याओं में से एक है।

इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं—

  • Pipe Joint ढीला होना।
  • Hose का क्षतिग्रस्त होना।
  • Rubber Seal खराब होना।
  • Valve में Leakage।
  • Cylinder Seal का घिस जाना।

यदि Leakage निर्धारित सीमा से अधिक हो जाए, तो Brake Pressure बनाए रखना कठिन हो सकता है।

Brake Binding

Brake Release होने के बाद भी यदि Brake Block अथवा Brake Pad Wheel से पूर्णतः अलग न हो, तो इस स्थिति को सामान्यतः Brake Binding कहा जाता है।

इसके संभावित कारण हैं—

  • Brake Cylinder Return में समस्या।
  • Brake Rigging का जाम होना।
  • Slack Adjuster का सही कार्य न करना।
  • Lever या Pin में अत्यधिक घिसाव।
  • Corrosion अथवा Mechanical Obstruction।

Brake Binding से—

  • Wheel गर्म हो सकता है।
  • Brake Block तेजी से घिस सकती है।
  • Fuel/Energy Consumption बढ़ सकता है।
  • Wheel Flat बनने की संभावना बढ़ जाती है।

Uneven Brake Wear

यदि सभी Wheels पर Brake समान रूप से कार्य न करे, तो कुछ Brake Blocks या Brake Pads अन्य की अपेक्षा अधिक घिसने लगते हैं।

इसके संभावित कारण हैं—

  • Brake Rigging का असंतुलन।
  • Slack Adjuster में दोष।
  • Brake Cylinder Stroke में अंतर।
  • Linkage में Wear।

ऐसी स्थिति में केवल Brake Block बदलना पर्याप्त नहीं होता; मूल कारण का पता लगाना आवश्यक है।

Brake Cylinder संबंधी दोष

Brake Cylinder में सामान्यतः निम्न समस्याएँ देखी जा सकती हैं—

  • Air Leakage
  • Piston Sticking
  • Push Rod Damage
  • Mounting Loose
  • Seal Wear

इनमें से किसी भी दोष का सीधा प्रभाव Brake Force पर पड़ता है।

Distributor Valve संबंधी दोष

Distributor Valve Air Brake System का नियंत्रण केंद्र है।

यदि इसमें दोष उत्पन्न हो जाए, तो—

  • Brake Apply नहीं होगी।
  • Brake Release में विलंब होगा।
  • Brake Pressure असामान्य होगी।
  • Brake Cylinder सही प्रकार से कार्य नहीं करेगी।

इसलिए Distributor Valve का निरीक्षण अत्यंत सावधानी से किया जाता है।

Brake Block / Brake Pad Wear

Brake Block अथवा Brake Pad का घिसाव सामान्य प्रक्रिया है, परन्तु यदि—

  • Wear असमान हो,
  • Crack दिखाई दे,
  • Oil या Grease लग जाए,
  • निर्धारित सीमा से अधिक घिस जाए,

तो उसे सेवा में रखना उचित नहीं माना जाता।

निरीक्षण के समय विशेष सावधानियाँ

ब्रेक प्रणाली का निरीक्षण करते समय निम्नलिखित सावधानियाँ अपनाई जानी चाहिए—

  • रेक को सुरक्षित (Protected) स्थिति में रखें।
  • Air Pressure की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति का ध्यान रखें।
  • Hose खोलने से पहले Pressure Release सुनिश्चित करें।
  • किसी भी Air Leakage को नज़रअंदाज़ न करें।
  • Brake Rigging के सभी Split Pins एवं Safety Devices की जाँच करें।
  • Brake Test के बिना किसी प्रमुख मरम्मत को पूर्ण न मानें।
  • निरीक्षण के निष्कर्षों को Maintenance Record में दर्ज करें।

C&W कर्मचारी की व्यावहारिक जिम्मेदारियाँ

ब्रेक प्रणाली के निरीक्षण के दौरान C&W कर्मचारी की जिम्मेदारी केवल दोष पहचानने तक सीमित नहीं होती। उसे यह भी सुनिश्चित करना होता है कि—

  • पूरी रेक में Brake Continuity उपलब्ध हो।
  • सभी Brake समान रूप से कार्य करें।
  • Brake Release पूर्णतः हो।
  • Brake Power निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
  • सुरक्षा से संबंधित किसी भी दोष को तत्काल दूर किया जाए।
  • सभी निरीक्षण एवं मरम्मत का अभिलेखन किया जाए।

व्यावहारिक उदाहरण

एक LHB रेक के Brake Power Test के दौरान पाया गया कि एक कोच में Brake Apply सामान्य थी, लेकिन Brake Release में विलंब हो रहा था।

क्रमिक निरीक्षण में निम्न संभावनाओं की जाँच की गई—

  • Brake Cylinder
  • Distributor Valve
  • Slack Adjuster
  • Brake Rigging

जाँच में पाया गया कि Brake Rigging के एक Pivot Point पर अत्यधिक जंग (Corrosion) होने के कारण Lever स्वतंत्र रूप से वापस नहीं आ रहा था।

सफाई, Lubrication एवं आवश्यक मरम्मत के बाद Brake Release सामान्य हो गई।

यह उदाहरण बताता है कि Brake System में दिखाई देने वाला दोष हमेशा Pneumatic भाग में ही नहीं होता; कई बार उसका कारण Mechanical Linkage भी होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य (Remember Points)

  • Air Brake System एक Fail-Safe System है।
  • Brake Pipe, पूरी रेक की Control Line है।
  • Feed Pipe, Air Supply बनाए रखती है।
  • Distributor Valve, Brake System का Control Unit है।
  • Brake Cylinder, Air Pressure को Mechanical Force में बदलती है।
  • Brake Rigging, Brake Force को Wheels तक पहुँचाती है।
  • Brake Block/Pad, Wheel पर वास्तविक Braking Force उत्पन्न करती है।
  • Brake Testing, निरीक्षण का अनिवार्य भाग है।
  • Air Leakage और Brake Binding, सबसे सामान्य दोषों में से हैं।
  • किसी भी Brake दोष की पुष्टि के बाद ही रेक को सेवा के लिए उपयुक्त घोषित किया जाना चाहिए।

Chapter Summary

इस अध्याय में हमने रेलवे कोच की Air Brake System का सिद्धांत, प्रमुख अवयव, कार्यप्रणाली, Brake Testing, निरीक्षण, अनुरक्षण तथा सामान्य दोषों का क्रमबद्ध अध्ययन किया।

यह स्पष्ट है कि Air Brake System केवल एक ब्रेक लगाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत उन्नत सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें Pneumatic एवं Mechanical दोनों प्रकार के अवयव समन्वित रूप से कार्य करते हैं। C&W विभाग की दृष्टि से इस प्रणाली का सही निरीक्षण एवं अनुरक्षण सुरक्षित रेल संचालन की मूल आवश्यकता है।


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