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13.3 रेलवे कोच बियरिंग के प्रकार (Types of Railway Coach Bearings)

13.3 रेलवे कोच बियरिंग के प्रकार

(Types of Railway Coach Bearings)

रेलवे कोचों में प्रयुक्त बियरिंगों का चयन उनकी भार वहन क्षमता (Load Carrying Capacity), गति (Speed), विश्वसनीयता (Reliability), अनुरक्षण आवश्यकता (Maintenance Requirement) तथा रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) के प्रकार के आधार पर किया जाता है।

वर्तमान समय में भारतीय रेलवे के अधिकांश यात्री कोचों में सीलबंद कार्ट्रिज टेपर रोलर बियरिंग (Sealed Cartridge Tapered Roller Bearing) का उपयोग किया जाता है। हालांकि रेलवे इंजीनियरिंग की दृष्टि से विभिन्न प्रकार की रोलर बियरिंगों का ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि अलग-अलग रेलवे प्रणालियों एवं विशेष प्रयोजनों में इनका उपयोग किया जाता है।

रेलवे बियरिंग का वर्गीकरण

रेलवे में प्रयुक्त बियरिंगों को निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है—

Railway Bearings
       │
 ┌─────┴──────────────┐
 │                    │
Plain Bearing    Rolling Bearing
                        │
        ┌───────────────┼────────────────┐
        │               │                │
Tapered Roller   Cylindrical Roller   Spherical Roller
        │
        ▼
Sealed Cartridge Bearing

1. प्लेन बियरिंग (Plain Bearing)

यह रेलवे की सबसे पुरानी Bearing प्रणाली है।

इसमें Axle Journal सीधे Bearing Surface पर घूमता है तथा घर्षण कम करने के लिए तेल (Oil) अथवा अन्य स्नेहक का उपयोग किया जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • Sliding Contact
  • अधिक घर्षण
  • अधिक ताप
  • नियमित Lubrication
  • अधिक Maintenance

वर्तमान स्थिति

भारतीय रेलवे के आधुनिक यात्री कोचों में इसका नियमित उपयोग नहीं किया जाता, किन्तु इसके सिद्धांत का ज्ञान ऐतिहासिक एवं परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

2. रोलर बियरिंग (Roller Bearing)

रोलर बियरिंग आधुनिक रेलवे तकनीक की आधारभूत प्रणाली है।

इसमें Sliding Contact के स्थान पर Rolling Contact होता है, जिससे घर्षण अत्यंत कम हो जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • कम Friction
  • Smooth Rotation
  • अधिक सेवा आयु
  • कम Heat Generation
  • उच्च Reliability

रोलर बियरिंग कई प्रकार की होती हैं।

3. टेपर रोलर बियरिंग (Tapered Roller Bearing)

यह रेलवे कोचों में सबसे अधिक प्रयुक्त Roller Bearing प्रकार है।

इसमें रोलर शंक्वाकार (Tapered) होते हैं, जिससे यह एक साथ Radial तथा Axial दोनों प्रकार के भारों को वहन करने में सक्षम होती है।

प्रमुख अवयव

  • Inner Ring
  • Outer Ring
  • Tapered Rollers
  • Cage
  • Seal
  • Grease

प्रमुख विशेषताएँ

  • उच्च Load Capacity
  • उत्कृष्ट Alignment
  • उच्च गति के लिए उपयुक्त
  • लंबी Service Life
  • कम Maintenance

भारतीय रेलवे में उपयोग

LHB Coaches सहित अधिकांश आधुनिक यात्री कोचों में इसी सिद्धांत पर आधारित Factory-Sealed Cartridge Tapered Roller Bearing का उपयोग किया जाता है।

4. सिलेंड्रिकल रोलर बियरिंग (Cylindrical Roller Bearing)

इस प्रकार की Bearing में Roller बेलनाकार (Cylindrical) होते हैं।

विशेषताएँ

  • Radial Load Capacity अधिक
  • Rolling Resistance कम
  • High Speed के लिए उपयुक्त

सीमाएँ

Axial Load वहन करने की क्षमता सीमित होती है। इसलिए इसका चयन अनुप्रयोग (Application) के अनुसार किया जाता है।

5. स्फेरिकल रोलर बियरिंग (Spherical Roller Bearing)

इस प्रकार की Bearing में Roller गोलाकार (Barrel-Shaped) होते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • Misalignment को सहन करने की क्षमता
  • भारी भार वहन क्षमता
  • कंपन वाली परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन

उपयोग

विशेष औद्योगिक मशीनों तथा कुछ विशेष Railway Applications में।

6. कार्ट्रिज रोलर बियरिंग (Cartridge Roller Bearing)

यह आधुनिक रेलवे कोचों में प्रयुक्त सबसे उन्नत Bearing व्यवस्था है।

इसमें—

  • Bearing
  • Grease
  • Seal
  • Cage

एक Factory-Assembled एवं Factory-Adjusted Unit के रूप में उपलब्ध होते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ

  • Factory Sealed
  • Factory Greased
  • Easy Replacement
  • Low Maintenance
  • High Reliability

इस प्रकार की Bearing को सामान्यतः खोलकर मरम्मत नहीं की जाती; निर्धारित मानकों के अनुसार दोषपूर्ण होने पर पूरी यूनिट बदली जाती है।

विभिन्न Bearing प्रकारों की तुलना

विशेषताPlainTapered RollerCylindrical RollerCartridge Roller
घर्षणअधिककमकमअत्यंत कम
Radial Loadमध्यमअधिकअत्यधिकअधिक
Axial Loadसीमितअच्छासीमितअच्छा
LubricationनियमितGreaseGreaseFactory Greased
Maintenanceअधिककमकमन्यूनतम
Reliabilityकमअधिकअधिकअत्यधिक

सही Bearing का चयन किन आधारों पर होता है?

रेलवे में Bearing का चयन निम्न बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है—

  • Axle Load
  • Maximum Operating Speed
  • Rolling Stock का प्रकार
  • Maintenance Philosophy
  • Reliability Requirement
  • Operating Environment
  • निर्माता एवं डिजाइन मानक

C&W कर्मचारी की दृष्टि से महत्व

C&W कर्मचारी को प्रत्येक Bearing के आंतरिक डिजाइन की विशेषज्ञता आवश्यक नहीं होती, लेकिन उसे यह अवश्य ज्ञात होना चाहिए—

  • संबंधित कोच में कौन-सी Bearing लगी है।
  • उसकी निरीक्षण विधि क्या है।
  • Grease Leakage, Seal Damage एवं Overheating के प्रारंभिक संकेत क्या हैं।
  • कब Bearing Assembly को सेवा से हटाना आवश्यक है।

यह जानकारी सुरक्षित एवं समयबद्ध अनुरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

व्यावहारिक उदाहरण

एक LHB कोच के निरीक्षण के दौरान एक Axle Box के आसपास ग्रीस के हल्के निशान दिखाई दिए। प्रारंभिक जाँच में Seal Damage की आशंका व्यक्त की गई। विस्तृत निरीक्षण में Bearing Assembly के बाहरी Seal में क्षति पाई गई। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार Bearing Assembly को बदल दिया गया। समय रहते कार्रवाई होने से संभावित Hot Axle की घटना टल गई।

महत्वपूर्ण परीक्षा बिंदु

  • Roller Bearing, Plain Bearing की तुलना में कम घर्षण उत्पन्न करती है।
  • Tapered Roller Bearing, Radial एवं Axial दोनों प्रकार के भार वहन करने में सक्षम होती है।
  • आधुनिक भारतीय रेलवे कोचों में मुख्यतः Factory-Sealed Cartridge Tapered Roller Bearing का उपयोग किया जाता है।
  • Cartridge Bearing सामान्यतः एक Complete Replacement Unit होती है।
  • Seal की क्षति Bearing Failure का प्रारम्भिक संकेत हो सकती है।


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